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श्री महावीर जैन आराधना केन्द्र का मुखपत्र
श्रुत सागर
आशीर्वाद : राष्ट्रसंत जैनाचार्य श्रीपद्मसागरसूरीश्वरजी म. सा. अंक : १ (प्रवेशांक) कार्तिक वि.सं. २०५२, अक्तूबर १९९५
प्रधान संपादक : मनोज जैन
संपादक : डॉ. बालाजी गणोरकर
आचार्य श्री कैलाससागरसूरि ज्ञानमंदिर
उद्भव और आज प. पू. गच्छाधिपति आचार्य श्री कैलाससागरसूरीश्वरजी महाराज की अभिलाषा थी कि कोवा में प. पू. आचार्य देव श्री पद्मसागरसूरीश्वरजी के मार्गदर्शन में एक छोटा सा मंदिर और पठन-पाठन की सुविधा से युक्त ज्ञानमंदिर हो. फल स्वरूप १९८२ से पूज्यश्री की प्रेरणा से श्री महावीर जैन आराधना केन्द्र आज अपनी विभिन्न शाखाओं प्रशाखाओं के साथ विकसित हो चुका है और विस्तरण कार्य प्रगति पर है.
अतिभव्य जिनालय एवं प.पू. गच्छाधिपति के नयनरम्य गुरू-मंदिर से
युक्त श्री महावीर जैन आराधना केन्द्र की आत्मा आचार्यश्री कैलाससागर सूरि 24-10-15
ज्ञानमंदिर है. प्रारम्भ में कल्पित एक सामान्य ज्ञानमंदिर के बजाय विशालकाय १५.netr mur. me) ज्ञानमंदिर साकार किया गया और इसके निम्नलिखित पाँच विभाग अपनी Train Mirmancar miRर विकास यात्रा में निरंतर प्रगति कर रहें हैं. dawn rior trnatient, १. देवर्द्धिगणि क्षमाश्रमण हस्तप्रत भाण्डागार : इसमें लगभग २ लाख जान ne zing
से अधिक प्राचीन दुर्लभ हस्तलिखित शास्त्र-ग्रंथ हैं. यहाँ आगम, न्याय, दर्शन, over 9 wrong " vra vida योग, व्याकरण, इतिहास आदि विषयों से सम्बन्धित अद्भुत ज्ञान का सागर है.
अनेक हस्तलिखित ग्रंथ सुवर्ण व रजत से आलेखित तथा सैकड़ों सचित्र हैं. jor a more genererear) af al २.आर्य सुधर्मास्वामी श्रुतागार : इस ग्रंथालय में भारतीय संस्कृति, धर्म
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एवं दर्शन के अतिरिक्त विशेष रूप से जैन धर्म से संबंधित लगभग ८० हजार
मुद्रित प्रतें एवं पुस्तकें हैं. .प
३. सम्राट सम्प्रति संग्रहालय : यहाँ पुरातत्य अध्येताओं और जिज्ञासु
दर्शकों के लिए पाषाण व धातु-मूर्तियाँ, ताड़पत्र व कागज पर चित्रित जैन मंदिर, ११ A, हायशम रोड, भवानीपुर, कलकत्ता ७०००२० पाण्डुलिपियों, लघुचित्र, पट्ट, विज्ञप्तिपत्र, काष्ठ तथा हस्तिदन्त से बनी
प्राचीन एवं अर्वाचीन अद्वितीय कलाकृतियों तथा शुत परम्परा का दर्शन करने ज्ञानमंदिर, कोबा की अहमदाबाद में शाखा...| वाली धर्मभाव एवं सांस्कृतिक उत्कर्ष दर्शाने वाली अन्यान्य पुरावस्तुओं को श्री महावीर जैन आराधना केन्द्र, कोबा द्वारा संचालित आचार्यश्री
इस प्रकार आकर्षक एवं प्रभावोत्पादक ढंग से प्रदर्शित किया गया है कि दृष्टा कैलाससागरसूरि ज्ञानमंदिर की पूर्णकालिक शाखा श्री जैन संघ ज्ञान भंडार की
को अपनी भव्य संस्कृति के प्रति गौरव एवं आस्था दृढ़ हो सके तथा साथ स्थापना पालडी विस्तार में करना तय हुआ है. इस ज्ञान भंडार के द्वारा यहाँ | ही इन अमूल्य कलाकृतियों का उचित संरक्षण भी हो. संगृहित ग्रंथों को श्रमण भगवंतों एवं अहमदाबाद में नदी पार के विशाल जैन ४.आर्यरक्षितसूरि शोधसागर : इस अनुभाग के अन्तर्गत जैन परम्परा . श्रावक वर्ग को वाचन हेतु उपलब्ध कराया जाएगा.श्री महावीर जैन आराधना |
के अनुरूप जैन साहित्य के संदर्भ में गीतार्थ निश्रित शोध-खोल/ अध्ययनकेन्द्र के इस स्तुत्य प्रयास से समस्त जैन संघ लाभान्वित होगा एवं बाल तथा |
संशोधन हेतु यथासम्भव सामग्री व सुविधाओं को उपलब्ध करा कर उसे युवावर्ग में भी पुस्तकों के पठन-पाठन से धार्मिक भावना में अभिवृद्धि होगी. फिलहाल जब तक इस नवीन शाखा हेतु स्थान उपलब्ध नहीं होता तब तक
प्रोत्साहित करना व सरल/ सफल बनाना इस कार्यक्रम का प्रमुख ध्येय है. इसका संचालन पालडी में जैन मर्चेट सोसायटी स्थित गीतार्थ गंगा के भवन
यहाँ पंच प्रतिक्रमणसूत्र को हिन्दी एवं अंग्रेजी में अर्थ सहित मुद्रित करने के से करवाने का तय किया गया है.
(शेष पृष्ठ २)
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