Book Title: Subodhika Kalpasutra Tika Gujarati Bhashantar
Author(s): Vinayvijay
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek

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Page 13
________________ श्रने बावीश तीर्थंकरोनां तीर्थमां तो जे साधु विगेरेने या श्रीने करेलुं होय ते तेनेज कल्पतुं नश्री छाने बीजाने कल्पे बे एवी रीते बीजो प्रदेशिक कल्प वे. २ ३ शय्यातर कल्प. त्री जो कल्प शय्यातर एटले जे उपाश्रयनो स्वामी होय ते, तेनो पिंग जे १ अशन, २ पान, ३ खादिम, ४ स्वादिम, ५ वस्त्र, ६ पात्र, ७ कांवल, ८ रजोहरण, ए सोय, १० अस्तरो, ११ नख तथा दांत सुधारवानुं छात्र ने १२ कर्णने सुधारवानुं साधन, ए बार प्रकारनो बे, ते बधा तीर्थंकरोनां तीर्थोमां सर्व साधुउने कल्पे नहीं, कारण के तेथी अनेषणीय वस्तुनो प्रसंग, छाने उपाश्रय मलवो दुर्लज थाय इत्यादि घणा दोष लागवानो संजव बे. जो साधु बधी रात्रि जागे अने प्रातःकाले प्रतिक्रमण बीजे जइ करे तो ते मूल उपाश्रयनो स्वामी शय्यातर यतो नथी, अने जो साधु त्यां निद्रा करे छाने प्रतिक्रमण बीजे ठेकाणे करे तो ते वंनेना स्वामी शय्यातर थाय बे. तेमज चारित्रनी इछावाला उपधि सहित शिष्यने शय्यातरना घरनी तृण, मगल, जस्म (राख), मल्लक, पाटलो, बाजोट, शय्या, संस्तारो अने लेप विगेरे वस्तु ग्रहण करवी कल्पती नथी. ए त्रीजो शय्यातर कल्प जाणवो. ३ ४ राजपिंग कल्प. पिंड एटले सेनापति, पुरोहित, नगरशेठ, मंत्री अने सार्थवाह ए पांचेनी साथे राज्यनुं पालन करनार मूर्धा जिषिक्त जे राजा तेनो पिंग जे श्रशन, पान, खादिम, खादिम, वस्त्र, पात्र, कांवल ने रजोहरण ए या प्रकारनो कदेवाय ते. ते पहेला अने बेला तीर्थंकरोना साधुर्जने राजा पासे जतां श्रावतां सामंत विगेरेथी स्वाध्यायनो नाश थवानो संभव बे, वली साधुर्जना अपशुकन गणाय तेथी शरीरने व्याघात थवानो संजव बे तेमज खाद्यनो लोन, लघुता छाने निंदा विगेरे दोष थवानो पण संजव बे, तेथी ते राजपिंगनो निषेध करेलो बे. बावीश तीर्थंकरोना साधु हमेशां सरल अने प्राइ बे तेथी तेमने उ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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