Book Title: Savdhan Devdravya Vyavastha Margadarshak
Author(s): Vichakshansuri
Publisher: Kumar Agency

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Page 23
________________ कर सकूँगी ? वह धर्म पाई / गुरु के पास सवितादि के त्याग के नियम लिए / सुन्दर जीवन जीने लगी। अन्त में शुभ ध्यान में मरकर देवलोक में गई। __इसलिए अपने पूर्वावार्य कहते हैं कि मन्दिर की कोई भी चीज या उपकरण का अपने स्वयं के काम में उपयोग नही करना चाहिए - ताकि देवद्रव्य के भक्षण का पाप न लगे। जिस तरह मन्दिर की कोई भी चीज का अपने कार्य में उपयोग करना पाप है। उसी तरह मन्दिर की कोई भी अच्छी चीज अदल बदल कर ले लेतना यह भी भारी पाप बन्ध का कारण है और इस जन्म में भी दरिद्रतादि कई प्रकार से दुःखदायी बनता है। इस बात को जानने के लिए शुभंकर श्रेष्ठि की कथा उन्ही शास्त्रों में लिखी है। वह इस तरह है - कांचनपुर नगर में शुभंकर नाम के सेठ रहते थे। संस्कारी और सरल स्वभावी शुभंकर रोठ को प्रतिदिन जिनपूजा और गुरु वन्दन करने का नियम था / एक दिन सुबह में किसी जिनभक्त ने दिव्य

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