Book Title: Pushpvati Vichar Tatha Sutak Vicahr
Author(s): Khimji Bhimsinh Manek
Publisher: Bhimsinh Manek

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Page 15
________________ (१९३) • दालने उमवामां आवे , अथवा तो दालने फोतरांथी मुक्त करवामां आवे बे, ते कार्य पण रजस्वलाप्राप्त बाइए न करवू. हिंमोले बेसवानी पण मनाश्वे. तंबोल खावु के धाणी मालीया शेकवा ए पण अविधेय . खत पत्र हुंडी न वांचवी रे, नामुं बेखु न सूझें ॥ इस न बोलवू दोमवं रे, पुष्ट थाहार न जुंके ॥१॥ खत पत्र के ढुंमी वांचवी नहीं. तेमज नागें ले करवानुं पण काम न करवू. हसवू, बोलवु तथा दोम, विगेरे कर्मो पण परिहरवां. पौष्टिक आहार न करवो. धातुपात्रे नोजन तजो रे, माटी काष्ठ पाषाण ॥ जोयण सोयण तेहमां रे, खाट पाट म जाण ॥२२॥ ___ धातुपात्रमा जोजन करवुनहीं. माटीनु, लाकमार्नु के पाषागर्नु पात्र होय तो तेमां नोजन करीने पात्र क्यांश परग्वी देवं. विचार करतां एम लागे ले के धातुपात्र प्राणने संग्रही शकवानी शक्ति धरावे ने अने तेमां आकर्षक गुण रहेलो , तेथी तेमां लोजन करवानी ऋतुवंती बाश्ने मना करवामां आवी हशे. सूq होय तो जोय उपर सूवं, तेमां पण खाट पाटनो त्याग करवो. बुंदकावो तमे मत पीयो रे, मत द्यो हाथ ताली॥ रासमंमल मत खेलजो रे,नारी होय धर्मवाली ॥२३॥ शतुवंती बाइए बुंदनो कावो करीने पीवो नहीं. अर्थात् जेटखां उत्तेजक पीणां ने ते वर्जवां. परस्पर हाथनी ताली देवी

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