Book Title: Pravachansara ki Ashesh Prakrit Sanskrit Shabdanukramanika
Author(s): Kundkundacharya, A N Upadhye, K R Chandra, Shobhna R Shah, H C Bhayani, Nagin J Shah
Publisher: Prakrit Text Society Ahmedabad

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Page 66
________________ 61 सुराणं सुराणाम् 1.71 सुहो शुभः 1.9, 46, 72; 2.63, 64, सुरासुरमणुसिंदवंदिदं सुरासुरमनुष्येन्द्र- 65, 88 वन्दितम् 1.1 -सुहो -शुभः (देखो, असुहो) सुविदिदपयत्थसुत्तो सुविदितपदार्थसूत्रः सुहोवओगप्पेगेहिं शुभीपयोगात्मकैः 1.14 1.73 सुसीलेसु सुशीलेषु 1.69 सुहोवओगप्पगो शुभोपयोगात्मकः 1.69 सुह- शुभ- 1.11,73 सुहोवजुत्ता शुभोपयुक्ताः 3.45, 60 -सुह -शुभ (देखो, असुह, सुहोवजुत्तो शुभोपयुक्ताः 2.67 समसुहदुक्खो) सुहोवजुदा शुभोपयुता 3.53 सुहं सुखम् 1.13, 59, 65, 66, 68, से स्यात् 2.42;3.49,50 70 सेवमाणस्स सेवमानस्य 3.22 -सुहं -सुखम् (देखो, णिव्वाणसुहं, -सेसं -शेषम् (देखो, असेस) सग्गसुह) सेसा शेषाः 2.44; 3.10, 45 सुहजुत्ता शुभयुक्ता 3.46 सेसाणं शेषाणाम् 2.45 सुहदुक्खा सुखदुःखे 2.101 सेसे शेषान् 1.2 सुहपरिणामो शुभपरिणामः 2.89 सेसे शेषौ 2.44 सुहम्मि शुभे 1.79 सो सः 1.7, 16, 19, 21, 24, 32, सुहम्हि शुभे 2.95 35, 46, 49, 60, 72, 78, -सुहम्हि -शुभे (देखो, असुहम्हि) 79, 80, 81, 88, 89, 91; सुहिदा सुखिताः 1.73 2.6, 7, 15, 16, 17,27,36, सुहुमा सूक्ष्माः 2.75 40, 46, 47, 50, 55, 57, सुहुमादो सूक्ष्मत्वात् 2.40 59, 60, 62, 63, 65, 66, सुहुमेहि सूक्ष्मैः 2.76 86, 96, 98, 99, 102, 103, सुहेण शुभेन 1.9,70 104; 3.7, 14, 31, 39, 40, -सुहेण -शुभेन (देखो, असुहेण) 44,49,50, 65, 66, 69,72, सुहेसु सुखेषु 1.62 74 Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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