Book Title: Moksha Shastra arthat Tattvartha Sutra
Author(s): Ram Manekchand Doshi, Parmeshthidas Jain
Publisher: Digambar Jain Swadhyay Mandir Trust

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Page 891
________________ F प्रह पृष्ठ ४ E १११ १४३ १५० १५२ १८६ १६३ २१२ २१३ मोक्षशास्त्रका शुद्धिपत्र पंक्ति अशुद्धि शुद्धि २२ ऐसा ऐसी ययार्थ यथार्थ पर्याय पर्यायों सम्यग्दर्शन सम्यग्दृष्टि २२ और है, और १२ माहनीय मोहनीय जातिका जातिको अंतिम उसका उसके प्रत्येक अपेक्षा अपेक्षासे अंतिम उमशम उपशम करता कराता होनेवाले होनेवाली निरावण निरावरण मात्र दो मात्र साधिक दो रागको रागका शरार शरीर होता होते उनका उनके १४ प्रत्यक् #L .....३४४: . २१८ २३३ २३४ २५० २६२ २७३ २६२ १७ २३ अतिम ३१६ ३२० ३३१ ३४३ ३४७ ३७७ ३६४ ४१४ ४१५ ४१७ द्वर्धा देश दवा वासिना वस्तुके द्रव्यका किसी द्विर्धा दश देवों वासिनो वस्तुको द्रव्यको किसीके १८ . 24 * * क्षेत्रसे पश स्पर्श पांच

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