Book Title: Jain Sahityama Vikar Thavathi Thayeli Hani
Author(s): Bechardas Doshi
Publisher: Bechardas Doshi
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अंतियं सामाइयमाइयाई एकारस अंगाई अहिज्जइ "-भग० वा० पृ० ७९७.
५. "तुमं गोसाला! भगवया चेव पव्वाविए, x भग वया चेव बहुस्सुईकए " भग, बा० पृ० १२४७.
६." तते णं से मेहे अणगारे समणस्स भगवओ महावीरस्स तहाख्वाणं थेराणं अंतिए सामाइयमाइयाई एकारस अंगाई अहिज्जित्ता"-ज्ञाता० स० पृ० ७५
७" तते णं से थावच्चापुत्ते अरहतो अरिहनेमिस्स थेराणं अंतिए सामाइयमाइयाति चोइसपुव्वाइं अहिज्जति"-ज्ञाता० स० पृ० १०३
८. " से धण्णे सत्थवाहे x धम्म सोचा पव्वतिए एकारसंगवी "-ज्ञाता० स० पृ० २४१.
९. “तते ण से धम्मे अणगारे समणस्स भगवओ महावीरस्स तहारूवाणं थेराणं अंतिते सामाइयमाइयाई एक्कारस अंगाइं अधिज्जति "-अनुत्तरौपपातिक द० स० पृ० ४. .
१०. “तते ण से गोयमे अन्नदा कयाइ अरहतो अरिहुनेमिस्स तहाख्वाणं थेराणं अंतिए सामाइयमाइयाइं एकारस अंगाई अहिज्जति"-अन्तकृशा-स० पृ० २.
११. "तते णं से सुबाहू अणगारे समणस्स भगवओ. महावीरस्स तहारूवाणं थेराणं अंतिए सामाइयमाइयाई अहिज्जति"-विपाक० स० पृ० ९४.

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