Book Title: Jain Parmanuvad aur Vigyan
Author(s): Ranjankumar
Publisher: Z_Vijyanandsuri_Swargarohan_Shatabdi_Granth_012023.pdf

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Page 8
________________ नेमिचन्द्र के अनुसार" - मूल शरीर को न छोड़कर तैजस कार्मण रूप उत्तर देह के साथ-साथ जीव प्रदेशों के शरीर से बाहर निकलने को समुद्घात कहते हैं । यद्यपि यह सन्दर्भ जीव तत्त्व से जुड़ा है, जबकि हमारा विवेचन अजीव तत्त्व से संबंधित है। अतः यहाँ कुछ विरोधाभास हो सकता है, लेकिन उसे दूर करने के लिए हम इतना ही कहना चाहेंगे कि व्यतीकरण की पराकाष्ठा को समझने के लिए इससे अच्छा सन्दर्भ शायद उपलब्ध न हो, शायद यह भी एकपक्षीय मत ही हो, परंतु विवादास्पद नहीं । वैज्ञानिकों ने भी इस दिशा में प्रयोग किए। यद्यपि इनका चिंतन और प्रयोग इतना ज्यादा व्यापक नहीं है लेकिन परमाण्विक विखण्डन तथा इसी तरह के अन्यान्य प्रकल्पों के माध्यम से जो वैज्ञानिक तथ्य प्रकाश में आ रहे हैं वे वस्तुतः परमाणुओं के व्यतीकरण के सिद्धांत को ही संपुष्टि प्रदान करते प्रतीत होते हैं। इस प्रकार जैन एवं वैज्ञानिक परमाणुवादी अवधारणा को कुछ मान्यताओं के आधार पर तुलनात्मक रूप में प्रस्तुत करने का एक प्रयास किया गया है। कहीं-कहीं यह तुलना अत्यन्त सार्थक प्रतीत होती है, तो किसी क्षण इसमें अल्प व्यतिक्रम भी आया है जो स्वाभाविक भी है। उस अंतर का मुख्य कारण परंपरा एवं प्रणालीगत व्यवस्था है। १. २. यतीन्द्रसूरि स्मारकग्रन्थ जैन दर्शन सन्दर्भ तत्वोपप्लवसिंह (जयराशि) - संम्पा. - पं. सुखलालजी, गायकवाड़ ओरियण्टल इंस्टीट्यूट, बड़ौदा १९४०, पृ.१ सांख्यकारिका (ईश्वरकृष्ण ) - सम्पा. हरिदत्त शर्मा, द. ओरियण्टल बुक एजेंसी, पूना १९३३, ३.१०.१६ तत्त्वकौमुदी - सम्पा. - कृष्णनाथ न्याय पंचानन, कलकत्ता, ३.१०.१६ ३. वैशेषिकसूत्र ( कणाद ) - सम्पा. नंदलालसिंह, इंडियन प्रेस ४. ५. ६. इलाहाबाद, १.१.५ प्रभाकर मीमांसा - संपा. गंगानाथ झा, इलाहाबाद, पृ. ३५-३६ ब्रह्मसूत्र - शंकरभाष्य- निर्णयसागर प्रेस, बंबई ९.४३ श्रीभाष्य रामानुज - संस्कृत बुक डिपो, मद्रास १९३७, १.४३ अभिधर्मकोश वसुबन्धु- सम्पा. आचार्य नरेन्द्रदेव, हिन्दुस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद १९५९, १.२४ ७. तत्त्वार्थसूत्र उमास्वाति - विवे. सुखलाल संघवी, पार्श्वनाथ विद्याश्रम शोध संस्थान, वाराणसी १९९३, ५.१०.११ ambamb Jain Education International अनु. मार्टिन ग्रीण्डलिंजर- मॉलेकूल्स, मीर पब्लिशर्स, मास्को १९८६, पृ. १४ सतीशचन्द्र चट्टोपाध्याय एवं धीरेन्द्र मोहन दत्त - भारतीय दर्शन, पुस्तक भंडार, पटना पृ. ३९, १५८ - १५९, १३३ मॉलेकूल्स, पृ. १४ संपा. डेक्स्टर एस किम्बेल द बुक ऑफ पॉपुलर साइंस, I, द ग्रोलियर सोसाइटी इक्लेटा, न्यूयार्क १९५१, पृ. ३०८ १२. पुरी एवं शर्मा - प्रिंसपल्स ऑफ इन्आर्गेनिक केमिस्ट्री, पृ. ८. ९. १०. ११. १३. १४. १५. १६. १७. १८. पृ. १०० १९. फिजिकल साइंस- मैन्स कन्क्वेस्ट ऑफ मैटर एण्ड स्पेश, ओडम्स प्रेस लि., लॉग आर्क, लंदन, पृ. ८९ परमाणु संरचना, १९, ३१ २०. २१. फिजिकल साइंस-मैन्स कन्क्वेस्ट ऑफ मैटर एण्ड स्पेश, पृ. ९०, परमाणु संरचना, पृ. ३१ २२. डिफिनिशनल डिक्शनरी केमेस्ट्री, केन्द्रीय हिन्दी डायरेक्टोरेट, दिल्ली यूनिवर्सिटी १९७८, पृ. ४२५ परमाणु - सरंचना, पृ. ११ डिफिनिशनल डिक्शनरी-मॉर्डन फिजिक्स, केंद्रीय हिन्दी डाइरेक्टोरेट, दिल्ली यूनिवर्सिटी १९७८, पृ. १५८-१६० द बुक ऑफ पॉपुलर साइंस, पृ. ३१२ परमाणु संरचना, पृ. ८-९ फिजिकल साइंस-मैन्स कन्क्वेस्ट ऑफ मैटर एण्ड स्पेश, पृ. ९८-९९, आपेक्षिकता के सिद्धांत, पृ. ६९ तत्त्वार्थसूत्र (उमास्वाति), ५/११ सव्वेसिं खंधाणं जो अंतो तं वियाण परमाणु । सो सस्सदो असो एक्को अविभागी मुत्तिभावो । १७७१, पंचास्तिकाय, मूल परमश्रुत प्रभावक मण्डल, बम्बई, উম{ २४ २३. २४. २५. २६. १-४ वही, पृ. ४ द बुक ऑफ पापुलर साइंस I, पृ. ३१२-३१३ ए.पी. कोवी- ऑक्सफोर्ड एडवांस्ड लर्नर्स डिक्शनरी, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, नवम संस्करण, पृ. १०२३ द बुक ऑफ पॉपुलर साइंस । पृ. ३०८ लीवर लॉज- एटम्स एंड रेज- अरनेस्ट बेन लि. लंदन १९२४, पृ. ४० पुरुषोत्तम भट्ट चक्रवर्ती- परमाणु संरचना, म.प्र. हिंदी ग्रंथ अकादमी, भोपाल १९७३ पृ. ३८, एटम्स एण्ड रेज २७. २८. For Private Personal Use Only www.jainelibrary.org

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