Book Title: Jain Dharm me Bhakti ki Avdharna
Author(s): Sagarmal Jain
Publisher: Z_Sagar_Jain_Vidya_Bharti_Part_1_001684.pdf

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Page 18
________________ 36 जैन धर्म में भक्ति की अवधारणा स्मरण करता है, दूसरा जो ग्लान वृद्ध व रोगियों की सुश्रुषा करता है, उनमें कौन श्रेष्ठ है ? इस सम्बन्ध में स्पष्ट रूप से यह कहा गया है कि जो वृद्ध, रोगी आदि की सेवा करता है, वह भगवान की ही सेवा करता है। इस प्रकार भक्ति में सेवा की जो अवधारणा थी, उसने एक लोक-कल्याणकारी रूप ग्रहण किया, यही जैन भक्ति की विशेषता है। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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