Book Title: Jain Dharm Prakash 1960 Pustak 076 Ank 12
Author(s): Jain Dharm Prasarak Sabha
Publisher: Jain Dharm Prasarak Sabha

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Page 13
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir (ले. अगरचंद नाहटा ) कविवर समयसुन्दर रचित अप्रकाशित गीत ___ सतरहवीं शताब्दी में महोपाध्याय समयसुंदर राजस्थान व गुजरात के उल्लेखनी कवि हो गये हैं । उनके रचित साहित्य की सूचि बहुत लंबी है। केवल छोटी-२ भाषा कृतियों का एक संग्रह 'समयमुदर कृति कुसुमांजली' के नाम से चार वर्ष प्रकाशित किया था। उनमें उनकी ५६४ रचनायें प्रकाशित की गई थी, जिन्हें हमे करीब २५ वर्ष तक बहुत से ज्ञान भण्डारों की खोज करते हुए प्राप्त की थी। उसके बाद झंडियाला गुरू के जैन भन्डार का अवलोकन करने के लिए अम्बाला जाना पड़ा तो वहाँ एक प्रति समयसुंदरजी रचित गीतों की और मिली जिस में २०३ अप्रकाशित गीत थे। इसी तरह अन्य प्रतियों में भी कुछ गीत और सबन मिले। उन पांचों रचनाऔ को अप्रकाशित होनेसे यहाँ प्रकाशितकिया जा रहा है। समयसुंदरजी की बड़ी-२ और विशिष्ट रचनाओं को संक्षिप्त परिचय उपरोक्त ग्रंथ में दिया गया था उसके बाद कुछ ग्रंथ और मिले हैं जिनका परिचय फिर कभी दिया जायगा। वास्तव में इनकी रचनाएं इधर उधर वहुन बिखर गई हे अतः अलग-अलग भण्डारों से अज्ञात रचनाओं की उपलब्ध होती रहती है। जिन सज्जनों को हमारे उक्त ग्रंथहै अनुलिखित रचनाएं प्राप्त हों वे हमें जनकारी देने की कृपा करें। समयमुन्दरजी के अप्रकाशित गीत 1 और प्रतिबोध गीतम् । राग आझ्या) जलन झंपरियां का तूं सूतउ, बेगर जागि नहीं तउ बिगूतउ ॥१॥ जाक कारिमा कुटंव कादम मांहे खून३, हारइ कां तुं जन्म हाहू तउ ।। २ ।। जा० (कहे) लालचि लोम मइंटूत3. 'समयसुंदर' कहइ जागि जीव तुं तउ |॥३॥ ज० । इति जीव प्रतिबोध गीतं ॥३॥ परोपगार गीत (राग-माझ्या) ए उत्तम पुरुप कहीकजइ एवा, धन तेह नउ अवतार । कपूर अगर चन्दन कस्तूरी, पीडता पणि सुखकार रे॥१॥ ए०॥ સમાધાન-ઇન્દ્રિયની અપેક્ષા વિનાનું સામાન્ય આરાના સ્વરૂપના અધિકારમાં જંબુદ્વીપ પ્રજ્ઞપ્તિમાં ઉપયોગ માત્ર અક્ષદર્શન શબ્દને વિષય ત્યાં ઉપાદ અંતરદ્વીપના અધિકારમાં અને જીવાભિગમસૂત્રમાં सभये विधमान मेटले अन्यदर्शनापन्न “धम्मासासेसाआ जुगलं पसवंति ति" થાય છે એમ કહેવાય છે, માટે વિશ્વ ગતિમાં વવને છ મહિનાને આયુષ્ય બાકી રહે ત્યારે પુત્રપુત્રીરૂપ અચક્ષુદર્શન હોય છે. युगसने नम आपछ. युग्मं सुतसुतारु षण्मा90-(१२५) मघाये युक्षि मनुष्यानाशी सशेषजीविताः ।। प्रसूययान्नि त्रिदिवमेते मृत्वा આયુષ્ય બાકી રહે ત્યારે પુત્ર ઉત્પન્ન થાય ? समाधिना ॥ २०॥ . ઉદ-છ મહિનાને આયુષ્ય બાકી રહે ત્યારે ભાવાર્થ-છ માસનું આયુષ્ય બાકી રહે ત્યારે તેઓને પુત્રને જન્મ થાય, પછી તેઓ જ, પુત્રપગીરૂ૫ યુગલને જન્મ આપીને સમાધિપૂર્વક ૬૪, ૮૧ દિવસ સુધી પુત્રનું પાલન કરે છે. પહેલા મરીને એઓ વિગે જાય છે. (या) 1023) For Private And Personal Use Only

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