Book Title: Jain Agamo me Swarg Narak ki Vibhavana
Author(s): Hemrekhashreeji
Publisher: Vichakshan Prakashan Trust

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Page 320
________________ २९३ ९. तिलोयपण्णत्ति-यति वृषभाचार्य. संपा. उपाध्ये एवं जैन हीरालाल शोलापुर : संस्कृति रक्षकदल १०. प्रज्ञापनासूत्र भाग १-२-३ संपा. युवाचार्य श्री मधुकरमुनि प्रथमावृत्ति ब्यावर : श्री आगम प्रकाशन समिति । ११. मूलाचार आ. वट्टकेर वृत्ति-वसुनन्दि अनु-ज्ञानमतिजी नई दिल्ली : भारतीय ज्ञानपीठ १२. महापुराण. संपा. वैद्य पी. एल. अनु. जैन देवेन्द्रकुमार वाराणसी : भारतीय ज्ञानपीठ प्रकाशन । १३. राजवार्तिक (तत्त्वार्थसूत्र) अकलंकदेव संपा. जैन महेन्द्रकुमार काशी : भारतीय ज्ञानपीठ प्रथमावृत्ति १९५३, १९५७ १४. व्याख्याप्रज्ञप्ति भाग १-२-३-४ संपा. युवाचार्य श्री मधुकरमुनि प्रथमावृत्ति १९९३ ब्यावर : श्री आगम प्रकाशन समिति राज. १५. सभाष्य (तत्त्वार्थसूत्र) सिद्धसेन गणि संपा. कापडिया हीरालाल रसिकदास बम्बई : जीवनचंद्र साकरचंद झवेरी प्रथमावृत्ति १९१५ १६. स्थानांग सूत्र, संपा. श्री मधुकर मुनि प्रथमावृत्ति १९८१ आगम प्रकाशन समिति (ब्यावर) राज... १७. सूत्रकृतांग सूत्र भाग-१-२ संपा. युवाचार्य श्रीमधुकर मुनि ब्यावर : श्री आगम प्रकाशन समिति, प्रथमावृत्ति १८. सूयगडो भाग १-२ संपा. युवाचार्य महाप्रज्ञ लाडनू : जैन विश्वभारती, प्रथमावृत्ति १९८४ १९. श्लोकवार्तिलंकार(तत्त्वार्थसूत्र) विद्यानंदी संपा. कोदय माणिकचंद कलकत्ता : भारतीय जैन सिद्धान्त प्रकाशिनी संस्था Jain Education International 2010_03 For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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