Book Title: Indian Antiquary Vol 07
Author(s): Jas Burgess
Publisher: Swati Publications
View full book text
________________
YADAVA GRANT OF KANHAR ADEVA.
--
laघटूपा बारा मदिती। तमिम वदता
वान। J व त8 रामा।वदे-17 ना या जागा दिसकल पास ह सकन पनित।
दत। रामाधव देवसबाहा पाता का वरात हा यतवजनिक तदित र केरा) मा प.व दे । वनटा पुरवावाने बानी ताद तस वाघ में वतहान तदिनानाशाहयक नवनितिशालि । तेनदात-शनामे वल डामा त श दतिया
यकाने ना दिमाश तक नपारामद ति) समावदेवसबा मागतो नाहनचरातन पगमिता
मरान वदताकासनत रतश्यासाचा दिसहिना मामा च्यापित करीतधनपशपालना यास्मिनन । 17वनावदेवदेव प्रसोयरनमा दाह्मणानामा । शासनद पवनसुदृढ त क न वानाक।।।।
पनिहीत|| EJIणनामानिलावा ।।। आधागाजासरसामावदिवितहापापाटारात सर्व हार ठरताहाया पायरयका ताना कालिकामा याताद रमवा डिस्तामोदरविवादि: तस्विका 7E8||काशिकागाीयमदतफत पाठकस्तान
पाठकारयकाशिव सिजापायक पतपा। कस्ता पाठक तस्ठातात:।।Zरतगे। पवाजमातात सतत्रिक माहवतस्याहत
तः ।गा ईलामा स्पतितहा पापायसतापर Imपहवलस्थाहा 80 हारता गाटामा पद वह तत ताठा देत महवह लास्या हतबहादवितागा E के शव पहवह मास्तदा मोद पवई तस्याहतान।। सितामे En||काडि पागा आदित्यत्त हसतमाल । |दिवठपाध्यायस्याहतात। भादवाल्यागार तापायाण

Page Navigation
1 ... 362 363 364 365 366 367 368 369 370 371 372 373 374 375 376 377 378 379 380 381 382 383 384 385 386