Book Title: Anusandhan 2007 01 SrNo 38
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
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सिंहासण पायपीठ, रयणे जडिउं अ, चालइ साथि अठारमइए || १८ ||
शिर ऊपरि त्रहि छत्र, धरी रहइ देवता,
रयणदंड उगणीसमइ ए । इन्द्रधज आकाश, रयणे जडीय, पंचवर्णी सोहइ वीसमए ए ॥ १९ ॥
एकवीसमइ सुरराय, जिन पाए ठवइ, रूडां नव सोवन कमल । बावीसमइ गढ त्रणि, रयण रूपमय, गढ त्रीजु सोवन विमल ॥२०॥
मद्धिभाग मणिपीठ, बइसी शंहासनि, दे देशन जिनवर भली ए ।
श्री पहिला कूणि ईशाणि, दस इन्द्र - देवता, नर-नारी रही सांभलइ ए ||२१||
अगनि कूणि रहइ, त्रिहि साधु-साध्वी, वैमानिक देवी सुणइ ए । नैरति कुणि विचार, त्रिहुंनी देवीय भवनपति - विंतर - जोतिषी ए ॥ २२॥ चुथी वायनी कूणि, ए त्रिहुं देवता, भवनपति - विंतर - जोइसीया ए । इम कही परषध बार, गढ बीजइ वली तरीय सवे सहु तिहां रह्या ए ||२३|| रथ- पालखी वाहन्न, हस्ती तुरंगम, शस्त्रे सवे गढ त्रीजइ रहइ ए । मणि कोसीसांउलि, चिहुं दसि त्राहित्रिहि रखवाला पोलि अछइ ए ॥ २४॥
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अनुसन्धान- ३८
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