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नूतन प्रकाशन
पण्डित देवविमलगणि विरचितं
महाकाव्यम् ॥
श्रीहीरसुन्दर
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सटिप्पणीकं 'हीरसौभाग्य' उपरि लघुवृत्तिसमेतम् ॥
द्वितीयो विभागः
सम्पादक :
मुनि रत्नकीर्तिविजय:
प्रकाशक :
श्रीजैन ग्रन्थ प्रकाशन समिति
खम्भात
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अनुसन्धान ३३
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