Book Title: Agam Shabdakosha
Author(s): Mahapragna Acharya
Publisher: Jain Vishva Bharati

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Page 830
________________ शुद्धि-पत्र शब्द अइवट्ट अंकावई अंछ (अतिवृत्त) अंकधाई (अंकावती) अंचेत्ता (कर्षय) अंब अक्कबोंदि अगरल अगुत्तदुवार भ० २०११५ (अग्निषेण) भ०१५।३ (अर्चनीय) अगुत्ति अग्गिसेण अग्गिवेसायण अच्चणिज्ज अच्चय अच्छ (आस्) अछिदित्ता अज्जघोस अज्जम अज्झत्थ अट्ठसट्ठि अणणुण्णविय अणत्थदंडवेरमण अशुद्ध (अतिवर्त) अकधाई (अकावती) अचेत्ता (कषय) अब अक्कबद अंगरल अगुत्तदुवरा भ० २०१२५ (अग्निसेन) भ० ५।३ (अचनीय) अच्चय (अच्युत) पण्हा ॥३ -अच्छाहि भ० ६।६६ (अछित्वा) (आयघोष) (आयमन्) (अध्यात्म) सू० ११११८७ (अप्टषष्टि) (अनुज्ञाप्य) (अनर्थदण्डविरमाण) अणाभोगवत्तिय अणाहरिस्जिमाण भ० ८।२५८ (अनु + गम) अणुजाणामि भ०१६।३४ (अनजुकता) (अनुत्तरवन्ध) अणुर्धाम्मय -अच्छाहि भ० ६।१६६ (अछित्त्वा) (आर्यघोष) (आर्यमन्) (अध्यस्त) सू० ११११८७ (अष्टषष्टि) (अननुज्ञाप्य) (अनर्थदण्डविरमण) अणाभोगवत्तिया अणाहारिज्जिस्समाण भ०८।२६८ (अनु+गम्) अणुजाणामि भ० १६॥३४ (अनृजुकता) (अनुत्तरबन्ध) अणुधम्मिय अणुकंपा अणुगच्छ अणुजाण अणुज्जुया अणुत्तरबंध ८१५ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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