Book Title: Acharang Sutram Part 01
Author(s): Sudharmaswami, Jinhansasuri
Publisher: Jinshasan Aradhana Trust
View full book text
________________
॥१६॥
विषयः
परिशाय षड्जीव निकायवधविरतस्य मुनित्वम् द्वितीयमध्ययनं 'लोकविजयः' (६ उद्देशकाः) प्रथम उद्देशकः
शब्दादयो गुणाः संसारस्य मूलस्थानम्, गुणार्थिनां स्वरूपम् गुणार्थिनामपायाः प्रमादो न कार्यः
प्रमादिनां दोषा अपायाश्च उपदेशः
द्वितीय उद्देशकः
अरतित्यागे मोक्षः अनुपदेशवर्तिनां दोषाः
अनगारस्य स्वरूपम् अर्थलुग्धानां स्वरूपम्
दण्डाद् घिरतिरेव आर्यप्रवेदितो मार्गः
पृष्ठाङ्काः
११३
११३
११९
१२४
१२५
१२८
१३२
१३२
१३३
१३५
१३६
१३९
विषयः
तृतीय उद्देशकः
गोत्रमदो न कार्यः
अन्धत्वादि दृष्ट्वा समितभावः परिग्रहरक्तानां मूदत्वम्
वचारिणां स्वरूपादि,
संसारे मूढानां स्वरूपम् चतुर्थ उद्देशकः
भोगिनां रोगोत्पादे ऽसहायता सञ्चितस्यापि विनाश:
आशा - छन्दयोस्त्यागायोपदेशः, स्त्रीभिलोकस्य प्रव्यथितत्वम्
अप्रमादपूर्वक मौन' समनुवासनीयम्
पश्चम उद्देशकः
समुत्थित आमगन्धं परित्यजेत् कालादिशो भिक्षुः वस्त्राऽऽहारादिग्रहणे विधि
पृष्ठाङ्का
१४१
२४१
१४३
१४५
१४७
१५५
१५५
१५६
१५७
१६०
१६३
१६३
१६९
॥१६॥

Page Navigation
1 ... 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112 113 114 115 116 117 118 119 120 121 122 123 124 125 126 127 128 129 130 131 132 133 134 135 136 137 138 139 140 141 142 143 144 145 146 147 148 149 150 151 152 153 154 155 156 157 158 159 160 161 162 ... 496