Book Title: Aagam Sambandhi Saahitya 04 Aagam Sootr Laghu Bruhat Vishayanukram
Author(s): Anandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Param Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad

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Page 22
________________ आगम संबंधी साहित्य [भाग-4 ] अंगसूत्र-लघुबृहविषयानुक्रमौ [अंगसूत्र-४. “समवाय" ] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण पुन: संकलित: अंग-सूत्रस्य विषयानुक्रमः (आगम-संबंधी-साहित्य) ॥ अथ समवायाङ्गस्य लघुविषयानुक्रमः॥ ॥१६० सूत्राणि १६८ सूत्रगाथाः॥ १३५-६१० एकाङ्कादारभ्य यावदेकां ।१३७ सूत्रकृताङ्गविवेचनम् । १११ | १४० व्याख्याप्रज्ञप्तिसूत्रविवेचनम् ११५ सागरोपमकोटाकोटीं समवायाः १०५ १३८-६२७ स्थानाङ्गविवेचन ११२ | १४१ शातधर्मकथाङ्गर्विवचनं १३६ गणिपिटके आचाराङ्गविवेचनम् १०९ | १३९ समवायाजविवेचन .११४ । १४२ उपासकदशाङ्गविवेचनं १२० १२० । CI ||५॥ प्रत सूत्रांक यहां देखीए समवावा लघुक्रमः॥ १४१ ॥६ ॥ १४५ १४३ अन्तरुदशाङ्गविवेचनम् १२१ | १५० भवनादिवर्णनम् १४० | १५७-११९० समवसरणं १४४ अनुत्तरोपपातिकदशाङ्गवि० १२३ | १५१ नारकादिस्थितिः अवसर्पिणीजिनादि च १५२ १४५ प्रश्नव्याकरणावि० १२५ १५२ शरीरसूत्रम् . १५८-१४० अबसर्पिणीचक्रयादि १५३ १४६ विपाकवतविक १२८ १५३-७४ अवधिवेदनालेश्याऽऽ १५९-१६८० ऐरावतादौ जिनादि १५४ १४७-६५७ रष्टिवादवि० | १५४ आयुर्वन्धभेदोत्पादोद्वर्तनाविर- १३६-१६० निगमनम् १४८ गणिपिटकविराधनाराधना हाकर्षाः १४९ ___फलम् १३३ १५५ संहननसंस्थानानि । ॥ इति समवायाङ्गस्य लघुविष१४९-७२ राशिप्रज्ञापनास्थानानि १३६ | १५६ वेदः १५० यानुक्रमः॥ १३२ .दाराः १४७ १५० दीप क्रमांक के लिए देखीए 'सवृत्तिक आगम सुत्ताणि ~22~

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