Book Title: Aagam Sambandhi Saahitya 03 Aagam Sootradi Akaaraadi
Author(s): Anandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Param Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad

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Page 409
________________ आगम संबंधी साहित्य [भाग-3] नन्दी-आदि-सप्तसूत्राणि-गाथा-अकारादि [स-कार] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण पुन: संकलित: नन्दी-आदि गाथा-अकारादिः (आगम-संबंधी-साहित्य) प्रत सूत्रांक यहां देखीए १३८५ ५८७* ६ ५ ५३८ संसारपडिकमणं ९५सारपारगमणे * दीप क्रमांक के लिए देखीए १६११* TAGSSSSSSSSSSSSS संवेगेणं भंते जीवे किं संवेगो निब्वेओ संसज्जइ धुवमेअं संसजिमम्मि देसे |संसजिमेहिं वर्ज संसट्टेण य हत्थेण संसट्टेयरहत्यो संसत्तग्गणी पुण संसत्तभचपाणे मचग संसत्तभत्तपाणेसु संसत्तमसंसत्ता संसत्तं तत्तो चित्र संसत्तेण व दव्वेण संसयं खलु सो कुणइ . १५ संसरिभ थावरो३ ४४३ सा उ अविसेसियं ५ ३५० संसारस्थान्तसा य थावरा. १४४१% सार्ड पज आवरेण ४ २५९+ संसारत्था य सिद्धा य १४२१४ साएए पुंडरीए ५९३ संसारत्था य सिद्धाय १६२० सागरतं जहित्वा गं ३ १२६६ सागरा अउणतीसं तु सागरा अडवीसंतु ELEBRससारपारगमणे सागरा अहवीसं तु संसारमावन्न परस्स अट्ठा ७ ११८७ सागरा इकतीसंतु संसारसागराओ३ ९७ सागरा इकवीसंत ७२संसाराअडवीए मिच्छत्त ३ ९०९ सागराणि य सत्तेव २६१ संसारामओ आलोयणा उ ५ ४३+ सागरा सत्तवीस तु ४ ५०५ संसोधण संसमणं ६ ४५९ सागय साहिया दुन्नि ६ ५७६ संहिया य पदं चैव २ १३५४ सागरा साहिया सत्त २५३४ सा इह पुष्वाणुपुव्वी - ३५+ सागरोवममेगं तु १६१४ ACCOCC-600-+ २३१+ tee ७ १५९६* ७ १५९५ 'सवृत्तिक आगम ७ १५९७* सुत्ताणि -~409

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