Book Title: Aagam 40 Aavashyak Malaygiri Vrutti Mool Sootra 1 Part 01
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Deepratnasagar

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Page 14
________________ आगम (४०) “आवश्यक’- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+वृत्तिः) भाग-१ अध्ययनं -1, नियुक्ति: -, भाष्यं [-], मूलं - /गाथा-] मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[४०], मूलसूत्र-[१] "आवश्यक नियुक्ति: एवं मलयगिरिसूरि-रचिता वृत्ति: पनाह प्रत सूत्रांक % = % दीप अनुक्रम विषयः है नामादिकरणानि, (मा. १५२-१५४)। क्षेत्रकाळकर सावद्यार्थः, (गा. १०५१)। द्रव्यमावयोगाः (गा. पानि, भावेऽत्र मुतवद्धानिशीथास्यानि,(गा. १०३६)। नोश्रुतकरणम् , (गा. १०३१)। १०५३)। ... ... ... .. ... ५७८ ::.५५८ कताकृतादिद्वारसप्तकम्, (उदिष्टोपदेशादिषु)। आलोच- प्रत्याख्याने द्रव्याश्मेिदाः, (गा. १०५४)। यावच्छ माया नयाः, (गा. १०४० । १७५-१८३ भा.)। ५६५ | दार्थः, (गा. १०५५)। देशसर्वघातिपाते सामायिक, (गा. १०४१)। ... ५७२ जीवितनिक्षेपाः, (गा.१०५६ । १८९-१९० भा.)। ५८० भयनिक्षेपाः, अन्तं पोढा, (१८४-१८५ मा.)। ... ५७२ सामायिकसूत्रस्याः, सामायिकैकार्थाः निक्षेपा एपाम्, प्रत्याख्याने १४७ मताः (गा. १०५७) । त्रिकालपह(गा. १०४५) ... ... ५७४ णम्, (गा. १०५८)। ... ... ... है सामायिकस्य पर्यायाः, कर्टकर्मकरणविचारः, आत्मा का विविधादेरपुनरुकता, (गा. १०५९)। ... ... ol रकः, (गा. १०४९) ... ... ... ५७५ सर्वस्य निझेपाः, (गा. १०५०) देशसर्वादि, (गा. बन्यमावप्रतिक्रमणोदाहरणे, ( गा. १०६० ) । निन्दा * १८६-१८९ मा.)। .... ... ५७६ गईयो।, (१०६१-१०६२)। ... ...५८४ अत्र मूल संपादकेन रचित नियुक्ति-आदि-अनुक्रम: दर्शित:, उक्त पत्रांक: मुद्रित प्रतानुसार ज्ञातव्य: = ल land ~14~

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