Book Title: Aagam 40 Aavashyak Malaygiri Vrutti Mool Sootra 1 Part 01
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Deepratnasagar

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Page 13
________________ आगम (४०) “आवश्यक’- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+वृत्तिः) भाग-१ अध्ययनं -1, नियुक्ति: -, भाष्यं [-], मूलं - /गाथा-] मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[४०], मूलसूत्र-[१] "आवश्यक नियुक्ति: एवं मलयगिरिसूरि-रचिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक श्रीआव० मलयगि दीप अनुक्रम विषयः समा पात्रा नवपद्या व निरूपणं वस्तुनि आरोपणाचाः प्रकृन्यायाः, कर्मजाया लक्षणं तदृष्टान्तास, (गा. ९४६) ... ५२६ मार्गाद्या हेतवः, (गा. ९०३)। ... ...४८५ पारिणामिक्या लक्षणं उष्टान्ताच, (गा. ९५१)।... ५२०४ *देशकनिर्यामकमहागोपरवानि, (गा. ९२७)। ...४९४ तपःकर्मक्षयसिद्धौ सिवखरूपं समुद्घातः शैलेशी रागद्वपकवायेन्द्रियाणां भेदाः स्वरूपं दृष्टान्ताच, (गा.९२८)।४९७ | शाटीदृष्टान्तः पूर्वप्रयोगादयः लोकापप्रतिष्ठितावादि ईपरीषहस्वरूपं, उपसर्गाणां स्वरूपं दृष्टान्ताश्च । ...५०८ लाग्मारा अवगाहना संस्थानं देशप्रदेशस्पर्शना सिद्धानां - अनेकधाई निरुतयः, नमस्कारफलं च, (गा. ९२६) । ५१० लक्षणं सुखं च पर्यायाः, नमस्कारफलम् , (गा.९९२) । ५३४ कर्मशिल्पादिसिद्धाः, कर्मसिद्धः, (गा. ९२९)। शिल्प- आचार्यनिक्षेपादि, (ग. ९९९) ... ... ५४९ सिद्धः । (गा. ९३०)। विद्यासिद्धः, (गा. ९३१- | उपाध्यायनिक्षेपादि, (गा. १००७॥ मा. १५१) साधुनिझे-' २)। मने (३३) योगे. (३४) आगमार्ययोः, पादि, (गा.१०१७) उपसंहारः, संक्षेपविस्तारचर्चा, (मा. ३५) यात्रावा (३६) ... ... ५११ (पा. १०२०)। ... ... ... ५५० बुद्धिसिद्धस्वरूपं, बुद्धभेदाः, औत्पत्तिक्या रक्षणं दृष्टान्ताश्य, क्रमद्वारं प्रयोजनफले विख्यादयो दृष्टान्ताः, (गा.१०२५)। ५५३५ (गा. ९४४)। ... ... ... ५१६ | सम्बन्धः सामायिकसूत्रं च सव्याख्यान, निक्षेप्यपदानि, वे नायिक्या लक्षणं तद्दृष्टान्तान (गा. ९४५)। ... ५२३ (गा. १०२९)। ... अत्र मूल संपादकेन रचित निर्यक्ति-आदि-अनुक्रम: दर्शित:, उक्त पत्रांक: मुद्रित प्रतानुसार ज्ञातव्य: लावला E ~13~

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