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________________ श्री ऋषम श्रीकल्पमुक्तावल्यां परित्रम् // 372 // मू-पा-समणस्स भगवओ महावीरस्स जिढे इंदभूइ अणगारे गोयमसगुत्तेणं पंच समणसयाई वाएइ / मज्झिमए अग्गिभूई अणागारे गोयमसगुत्तेणं पंच समणसयाई वाएइ- कणीयसे अणगारे वाउभूई गोयमसगुत्ते णं पंचसमणसयाई वाएइ / थेरे अज्जवियत्ते भारदायगुत्ते णं पंचसमणसयाई वाएइ / थेरे अज्जमुहम्मे अग्गिवेसायणगुत्ते णं पंचसमणसयाई वाएइ / थेरे मंडियपुत्ते वासिहसगुत्ते णं अध्दुहाई समणसयाइं वाएइ / धेरे मोरियपुत्ते कासवगुत्ते णं अदुवाई समणसयाई वाएइ / थेरे अकंपिए गोयमसगुत्ते गं घेरे अयलभाया हारियायणगुत्ते णं ते दणि वि थेरा तिण्णि तिण्णि समणसयाई वाएन्ति / धेरे मेयज्जे थेरे पभासे ए दुणि वि थेरा कोडिन्ना गुत्तेणं तिण्णि तिण्णि समणसयाई वाएन्ति / से तेणटेणं अज्जो / एवम् बुच्चा समणस्स भगवओ महावीरस्स नव गणा इक्कारस गणहरा हुत्था // 3 // व्याख्या-॥अथ शिष्य प्रश्नोत्तरमाचार्य आह // श्रमणस्य भगवतो महावीरस्य ज्येष्ठः-इन्द्रभूतिनामा अनगारः-गौतमगोत्रः पञ्चश्रमणशतानि (500) वाचयति-मध्यमः-अग्निभूतिः-अनगारः पञ्चश्रमणशतानि (500) वाचयति / लघुः वायुभूतिः-अनगारः गौतमगोत्रः पञ्चश्रमणशतानि (500) वाचयति स्थविरः आर्यव्यक्तनामा भारद्वाजगोत्रः पञ्चश्रमणशतानि (500) वाचयति स्थविरआर्यमुधर्मा-अग्निवैश्यायनगोत्रः // 37 //
SR No.600451
Book TitleKalpasutram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanakvimalsuri
PublisherMuktivimal Jain Granthmala
Publication Year1968
Total Pages512
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_kalpsutra
File Size40 MB
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