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________________ श्रीकल्पमुक्तावल्या श्री नेमि नाथ चरित्रम् // 318 // सखि, चन्द्रानने भद्रे, समग्रगुणवत्यपि, वरेऽस्मिन्दुषणश्चैक, दृश्यतेऽप्रीतिसूचकम् // 65 // वराभिलाषिणी किञ्च, सखी राजीमती प्रिया, शृण्वन्त्यामत एतस्यां, वक्तं न शक्यते मया // 66 // // चन्द्राननाऽप्याह // सखि, कौरङ्गशावाक्षि, मयाऽपि ज्ञातमेव च, साम्प्रतं मौनमेवास्तु, मौनं सर्वार्थसाधनम् // 67 // ॥राजीमत्याह // राजीमत्यषि माध्यस्थ्य, दर्शयन्ती हिया तदा, प्रति सख्यौ जगादेवं, समयोत्तर कोविदा // 68 // यस्याः कस्याश्च कन्याया, वरोऽयम्भवताद्वरः, भुवनाद्भूतभाग्याया, निर्मलाकृतिपेशलः // 69 // परं सर्वगुणाधाने, वरेऽस्मिन् दूषणश्च यत्, असम्भाव्यं पयोमध्यात्पूतरकर्षणोपमम् // 70 // सविनोदं ततस्ताभ्या, मुक्त राजीमती प्रति, अतिगौरो वरः पूर्व, गुणा झेयास्तु संस्तवे // 7 // राजीमती प्राह ततश्च सेयँ, सख्यौ प्रतिज्ञातमहो मयाऽद्य, आस्तं युवा दक्षधियौ भ्रमो मे, त्वासीदिदानीङ्किल भग्न एव // 72 // बीजगुणानां भुवनेऽखिलानाम् , श्यामत्वमेकं वरभूषणश्च, सन्दूषितं तच्छृणुतं भवत्यौ, श्यामत्व गौरत्वगुणाभिदोषान् // 73 // 1 परिचये सति | // 31 //
SR No.600451
Book TitleKalpasutram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanakvimalsuri
PublisherMuktivimal Jain Granthmala
Publication Year1968
Total Pages512
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_kalpsutra
File Size40 MB
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