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________________ श्रीकल्पमुक्तावा श्री नेमिनाथ चरित्रम् // 316 // लग्नं पृष्ट स्ततः प्राह, क्रोष्टुकि गणकोत्तमः / वर्षाकालोऽधुना योग्यो, विवाहो नेति बुध्यताम् // 47 // वर्षासु शुभकार्याणि, न कुर्वन्ति हि कानि च / मुख्यकार्य विवाहस्य, गेहिनान्त्वत्र का कथा // 48 // कथञ्चिद्धरिणा नेमि, विवाहाय प्रवर्तितः / कालातिक्रमणं योग्य, समुद्रः प्राह नेति तम् // 49 // अन्तरायो यथा माभू-द्विवाहे तद्दिनं वद / निर्दोषा श्रावणे षष्ठी, विवाहस्तत्र कार्यताम् // 50 // स्फारालङ्कारशोभी मुदमधिक वहन् सत्प्रजानां रथस्थः, श्रीमत्सामुद्रभूपाच्युतबलप्रमुखै वेष्टितश्च्छत्रसारः / श्रीमद्राझ्यादिवामाविमलमुखकजै र्गीयमानोदयोऽसौ, श्रीमन्नेमिः कुमारः शिसदनमतिः पाणिपीडार्थमार्च्छत् // 51 // अग्रतः प्रतियान् नेमि, र्वीक्ष्यातिधवलं गृहम् / कस्येदं सारथिं प्रीत्या, पृष्टवान् नीतिनैपुणः॥५२॥ दर्शयश्च ततोऽगुल्या, सोऽप्युत्तरमदो ददौ / प्रासादः श्वशुरस्यायं, तवोग्रसेन भूपतेः // 53 // इमे सख्यौ च भार्याया, राजीमत्याश्च ते विभो। चन्द्रानना कुरङ्गाक्षी, मिथो वार्तयतो मुदा॥५४॥ // मृगलोचना, चन्द्राननां प्राह // चन्द्राननेऽवलावर्गे, वर्णनीयाऽस्ति नौ सखी / राजीमती च सद्भाग्या, मन्येऽहं पूर्वपुण्यतः // 55 // त्रिलोकीनायको भर्ता, नेमि यस्याश्च राजसूः / ग्रहीष्यत्यमलं पाणिं, मन्मथाकृतिजित्वरः // 56 // 1 शिबादेवीप्रमुखप्रमदा // 316 //
SR No.600451
Book TitleKalpasutram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanakvimalsuri
PublisherMuktivimal Jain Granthmala
Publication Year1968
Total Pages512
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_kalpsutra
File Size40 MB
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