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________________ श्री कल्पमुक्तावल्यां चतुर्दशस्वप्नाधिकार // 77 // // व्याख्या // यस्यां रात्रौं श्रमण भगवान् महावीरो देवानन्दा ब्राह्मण्या जालन्धर सगोत्रायाः कुक्षित स्त्रिशला क्षत्रियाण्या वासिष्ठगोत्रायाः कुक्षौ गर्भतया मुक्तः तस्यामेव रात्री सा देवानन्दा ब्राह्मणी शय्यायां सुप्त जागराअल्पनिन्द्राङ्कर्वती-इमान्-पतद्रूपान्-उदारान् कल्याणान् शिवान् धन्यान् मङ्गलमयान इमान् चतुर्दश महास्वमानू त्रिशलया क्षत्रियाण्याहृता-इति दृष्ट्वा जागरिता-तद्यथा-गयवसह-इति गाथाऽत्र वाच्या // 31 // मूलपाठः-जं रयणि च णं समणे भगवं महावीरे देवाणंदाए माहणीए जालन्धर सगुत्ताए कुच्छिी तिसलाए खत्तियाणोए वासिष्ट सगुत्ताए कुञ्छिसि गम्भत्ताए साहरिए तं रयगि चणं सा तिशला खत्तियाणी तसि तारिसगंसि वासघरंसि अभितरओसचित्तकम्मे बाहिरओ दुमिअघट्टमहे विचित्त उल्लोअ चिल्लिअतले मणिरयणपणासि अंधयारे बहुसम सुविभत्त भूमि भागे पंचवन्नसरससुरहिमुक्क पुप्फपुंजोवयार कलिए कालागुरुपवर कुंदुरुक्क तुरुक्कडझंतधूवमघमघंतगं धुध्धुभिरामे-सुगंधवर गंधिए गंधवट्टिभूए तंसि तारिसगंसि सयणिज्जंसि सालिंगणवट्टिए उभी बिब्बोअणे सा उभओ उन्नए मज्झे नयगंभीरे गंगा पुलिणवालुआ उद्दालसालिसए ओअविअ खोमिअ दुगुल्लपट्ट पडिच्छन्ने सुविरइ अरयत्ताणेरत्तं सुअसंवुडे सुरम्मे आइणगरू बूर नवगी तूल तुल्लफासे सुगंधवर कुसुम चुन्न सवणोवयार कलिए पुन्वरत्तावरत्तकाल समयंसि सुत्तजागरा ओहीरमाणी ओहीरमाणी इमेयारूवे उराले जाव चउद्दश महामुमिणे पासित्ताणं पडिबुद्धा तंजहा-गय 1 वसह 2 सीह 3 अभिसेअ 4 दाम 5 ससि 6 दिणयर 7 जयं 8 कुम्भम् 9 पउमसर 10 सागर 11 विमाण 12 भवण रयणुच्चय 13 सिहिं च // 32 //
SR No.600451
Book TitleKalpasutram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanakvimalsuri
PublisherMuktivimal Jain Granthmala
Publication Year1968
Total Pages512
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_kalpsutra
File Size40 MB
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