SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 106
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ श्री कल्पमु गर्भपरावर्तः क्तावल्या काले यस्मिन्महारम्ये हरिणादिगमेषिकः // देवो देवं महावीरं देवानन्दा सुकुक्षितः // 1 // आदाय त्रिशला कुक्षौ भगवन्तं मुमोच शम् // ज्ञानत्रयप्रभादीप्तस्तदाऽऽसीद्भगवान् स्वयम् // 2 // तदा ज्ञानेन मां देवः संहरिष्यति मन्थरम // देवानन्दासुकुक्षेश्च जानाति हरणे न च // 3 // मंहतोऽस्मि च देवेन जानातीति प्रभुर्नहि // जानन्नपि महाश्चर्य तदेवात्र विवर्ण्यते // 4 // संहृतिसमयस्यापि त्वसख्यकाल हेतुतः॥ कथं नो संहति आता ज्ञायतामत्र कारणम् // 5 // संहृतेः कौशलश्चात्र तस्य देवस्य बोधयन् // ज्ञातमपि तथाऽज्ञातं नकारेण न्यवेदयत् // 6 // कण्टकोद्धति दृष्टान्तो बुध्यतामत्र धीधनैः // प्रायो वाक्याथ दाढर्याय दृष्टान्तो हि प्रशस्यते // 7 // तथा कश्चिच्च कं नम्रं कण्टकोद्धतिकारिणम् // एवम्ब्रवीति भो भद्र ? दक्षोऽसि कण्टकोद्धतौ // 8 // मत्पादात्वयका सद्यो निष्कासितोऽपि कण्टकः॥ मयका न च विज्ञातं कौशलन्तव चोत्तमम् // 9 // ह्रियमाणो न जानाति वचनादिति भावुकाः // आचारङ्गस्य सूत्रस्य विरोधो नात्र कश्चन // 10 // मूलपाठः-जं रयणि च णं समये भगवं महावीरे देवाणंदाए माहणीए / जालन्धर सगुत्ताए कुच्छिओ तिसलाए खत्तियाणीए वासि? सगुत्ताए कुच्छिसि गम्भत्ताए साहरिए तं रयणि चणं सा देवाणंदा माहणी सयणिज्जसि सुत्तजागरा ओहीरमाणी-ओहीरमाणी इमेयारूवे उराले कल्लाणे सिवे धन्ने मंगल्ले // सस्सिरीए चउद्दस महा सुमिणे तिसलाए खत्तियाणीए हडेत्ति पासित्ता ण पडिबुद्धा तं जहा गयवसह गाहा // 31 // जा॥७६ //
SR No.600451
Book TitleKalpasutram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanakvimalsuri
PublisherMuktivimal Jain Granthmala
Publication Year1968
Total Pages512
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_kalpsutra
File Size40 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy