________________ आवश्यकनियुक्तेरव चूर्णिः // 243 // जम्मण विणीअ उज्झा सावत्थी पंच हत्थिणपुरम्मि / वाणारसि कंपिल्ले रायगिहे चेव कंपिल्ले // 397 // मातृदारमाहसुमंगला जसवई भद्दा सहदेवि अइर सिरि देवी / तारा जाला मेरा य वप्पगा तह य चूलणी अ॥ 398 // पितॄनाहउसमे सुमित्तविजए समुद्दविजए अ अस्ससेणे य / तह वीससेण सूरे सुदंसणे कत्तविरिए अ॥ 399 // पउमुत्तरे महाहरि विजए राया तहेव बंभे य। ओसप्पिणी इमीसे पिउनामा चक्कवहीणं // 400 // पर्यायः केषाश्चित्प्रथमानुयोगतोऽवसेयः, केषाञ्चित्प्रव्रज्याभावान्न विद्यत एव // 399-400 // अथ गतिमाहअट्ठेव गया मोक्खं सुभुमो बंभो असत्तमि पुढवि / मघवं सणंकुमारो सणंकुमारं गया कप्पं // 401 // एवं चक्रिणोऽप्यधिकृत्य गता प्रतिद्वारगाथा, अथ वासुदेवबलदेवानां वर्णप्रमाणद्वारद्वयमाहवण्णेण वासुदेवा सच्चे नीला बला य सुक्किलया। एएसिं देहमाणं वुच्छामि अहाणुपुबीए॥४०२॥ पढमो धणूणऽसीई सत्तरि सट्टी य पन्न पणयाला / अउणत्तीसं च धणू छबीस सोलसा दसेव // 403 // नामानि प्रागुक्तान्येव, गोत्राण्याहबलदेववासुदेवा अट्टेव हवंति गोयमसगुत्ता / नारायणपउमा पुण कासवगुत्ता मुणेअबा // 404 // अथ वासुदेवानामायुराह चक्रिणां मातापितगतिद्वाराणि |नि० गा. 397-401 | वासुदेवादीनां वर्णप्रमाणगोत्राणि नि० गा० 402-404 // 243 //