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________________ श्रीभगवत्यङ्गं श्रीअभय. २०शतके उद्देशक: 5 वृत्तियुतम् सूत्रम् 668 भाग-३ परमाण्वादिवर्णादिः // 1300 / क्वसंजोए एकारस भंगा सव्वे ते चउक्कगसंजोएणं पणपन्नं भंगा, जइ पंचवन्ने सिय कालए य, नीलए य, लोव्य य, हा॰ए य, सु०ए य१सिय कालए य, नीलए, लो०ए, हा०ए, सुगा य 2 सिय कालए, नीलए, लो०ए, हागा य, सु०ए य 3 सिय कालए, नीलए, लोगा, हा०ए य, सु०ए 4 सिय कालए य, नीलगाय, लो०ए य, हा०ए, सु०ए य५ सिय कालगा, नीलगे य, लोगे य, हा०ए य, सु०ए 6 एवं एए छब्भंगा भाणियव्वा, एवमेते सव्वेवि एक्कगदुयगतियगचउक्कगपंचगसंजोगेसु छासीयं भंगसयं भवति / गंधा जहा पंचपएसियस्स / रसा जहा एयस्सेव / वन्ना फासा जहा चउप्पएसियस्स // 7 सत्तपएसिएणं भंते! खंधे कतिवन्ने०?, जहा पंचपएसिए जाव सिय चउफासेप०,जइ एगवन्ने एवं एगवन्नदुवण्णतिवन्ना जहा छप्पएसियस्स, जइचउवन्ने सिय कालए य, नीलए य, लोहियए य, हालिद्दए य१सिय कालए य, नीलए य, लोहियए य, हालिद्दगा य 2 सिय कालए य, नीलए य, लोहियगा, हालिद्दए 3 एवमेते चउक्गसंजोगेणं पन्नरस भंगा भाणियव्वा जाव सिय कालगाय, नीलगाय, लोहियगा य, हालिद्दए य 15 एवमेते पंचचउक्कसंजोगा नेयव्वा एक्कक्के संजोए पन्नरस भंगा सव्वमेते पंचसत्तरि भंगा भवंति / जइ पंचवन्ने सिय का० य, नी० य, लो०ए, हा०ए, सु०ए 1 सिय कालए, नीलए य, लो०ए य, हालिद्दगे य, सुकिल्लगा य 2 सिय कालए य, नीलए, लो०ए, हा॰गा य, सु०ए य 3 सिय कालए य, नीलए य, लो०ए य, हा गाय, सुगा य 4 सिय कालए य, नीलए य, लोगा य, हा०ए य, सु०ए य ५सिय कालए य, नीलए य, लोगा य, हागे य, सु०एय 6 सिय कालए य, नीलए य, लोगा य, हागा य, सु०ए य 7 सिय कालए य, नीलगाय, लोगेय, हा०ए य, सु०ए य 8 सिय कालगे य, नीलगाय, लो०ए य, हा एय, सुगा य९सिय कालगे य, नीलगाय, लोगे, हागा, सु०ए य 10 सिय कालए य, नीलगाय, लोगा य, हा०ए य, सु०ए य 11 सिय कालगा य, नीलगे य, लो०ए य, हा०ए य, सु०ए य 12 सिय कालगा य, नीलगे य, लोगे य, हा०ए य, सुल्गा य 13 सिय कालगा य, नीलए य, लो०ए य, हागा य, सु०ए य 8 // 1300 //
SR No.600445
Book TitleVyakhyapragnaptisutram Part 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDivyakirtivijay
PublisherShripalnagar Jain Shwetambar Murtipujak Derasar Trust
Publication Year2012
Total Pages562
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size38 MB
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