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________________ 12 शतके उद्देशक:४ श्रीभगवत्यङ्ग श्रीअभय. वृत्तियुतम् भाग-२ // 941 // खंधा भवंति अहवा एग० परमाणुपो० एग• दुपएसिए एग० तिपएसिए एगयओ चउप्पएसिए खंधे भवति अहवा एग० परमाणुपो० एग० तिन्नि तिपएसिया खंधा भवंति अहवा एग० तिन्नि दुपएसिया खंधा एग० चउपएसिए खंधे भ० अहवा एग दो दुपएसिया खंधा एग० दो तिपएसिया खंधा भवंति, पंचहा कज्जमाणे एग• चत्तारि परमाणुपो० एग० छपएसिए खंधे भवइ अहवा एगयओ तिन्नि परमाणुपो० एग• दुपएसिए खंधे० एग० पंचपएसिए खंधे भ० अहवा एग• तिन्नि परमाणुपो० एग. तिपएसिए खंधे एग० चउपएसिएखंधे भ० अहवा एग दो परमाणु० एग दुपएसिए खंधे० एग० दो तिपएसिया खंधा भवंति अहवाएगयओपरमाणुपो. एग० तिन्नि दुपएसिया० एग तिपएसिए खंधे भ० अहवा पंच दुपएसिया खंधा भवंति, छहा कज्जमाणे एगयओ पंच परमाणु एग० पंचपएसिए खंधे भ० अहवा एग० चत्तारि परमाणुपो० एग• दुपएसिए० एग० चउपएसिए खंधे भवति अहवा एगयओचत्तारि परमाणुपो० एग० दो तिपएसिया खंधा भवंति अहवा एग० तिन्नि परमाणु० एग० दो दुपएसिया खंधा एगतिपएसिएखंधे भवति अहवा एगयओदो परमाणुपो० एग० चत्तारि दुपएसिया खंधा भवंति, सत्तहा कज्जमाणे एगयओ छ परमाणुपो० एग० चउप्पएसिए खंधे भ० अहवा एग० पंच परमाणुपो० एग० दुपएसिए एग० तिपएसिए खंधे भ० अहवा एग. चत्तारि परमाणुपो० एग• तिन्नि दुपएसिया खंधा भवंति, अट्ठहा कज्जमाणे एग. सत्त परमाणु० एग• तिपएसिए खंधे भ० अहवा एग० छ परमाणुपो० एग. दो दुपएसिया खंधा भवंति, नवहा कज्जमाणे एग० अट्ठ परमाणु० एग० दुपएसिए खंधे भ० अहवा एग० छ परमाणुपो० एग० दो दुपएसियाखंधा भवंति, दसहा कज्जमाणे दस परमाणुपोग्गला भवंति। 10 संखेज्जा भंते! परमाणुपोग्गला एगयओसाहन्नंति एगयओसाहण्णित्ता किं भवति?, गोयमा! संखेजपएसिएखंधे भवति, से भिज्जमाणे दुहावि जाव दसहावि संखेजहावि कजंति, दुहा कञ्जमाणे एगयओ परमाणुपोग्गले एगयओ संखेजपएसिए खंधे धिकारः। सूत्रम् एकद्वित्र्यादिदश यावत्सङ्खयेयासङ्ख्येयानन्ताणुएकतयास्कन्धेनभेदेन च स्कन्धादिभङ्गाः। // 941 //
SR No.600444
Book TitleVyakhyapragnaptisutram Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDivyakirtivijay
PublisherShripalnagar Jain Shwetambar Murtipujak Derasar Trust
Publication Year2012
Total Pages574
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size15 MB
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