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________________ 11 शतके उद्देशकः 10 लोका श्रीभगवत्यङ्गं श्रीअभय वृत्तियुतम् भाग-२ // 880 // पयाए एगे देवे दाहिणपुरच्छा० पयाए एवं जाव उत्तरपुरच्छा० एगे देवे उड्डाभिमुहे एगे देवे अहो० पयाए, तेणं कालेणं 2 वाससयसहस्साउए दारए पयाए, तएणं तस्स दारगस्स अम्मापियरोपहीणा भवंति नोचेवणं ते देवाअलोयंत संपा०, तंचेव०, तेसि णं देवाणं किं गए बहुए अगए बहुए?, गोयमा! नो गए बहुए अगए बहुए गयाउ से अगए अणंतगुणे अगयाउ से गए अणंतभागे, अलोएणं गोयमा! एमहालए पन्नत्ते॥सूत्रम् 421 // 21 लोगस्सणंभंते! एगंमि आगासपएसे जे एगिदियपएसा जाव पंचिंदियपएसा अणिंदियपदेसा अन्नमन्नबद्धा अन्नमन्नपुट्ठाजाव अन्नमन्नसमभरघडताए चिटुंति,अस्थिणंभंते! अन्नमन्नस्स किंचि आबाहं वा वाबाहं वा उप्पायंति छविच्छेदं वा करेंति?,णो तिणढे समढे, से केणटेणं भंते! एवं०० लोगस्स णं एगंमि आगासपएसे जे ए०पएसा जाव चिट्ठति णत्थि णं भंते! अन्नम० किंचि आवाहं वा जाव करेंति?, गोयमा! से जहानामए नट्टिया सिया सिंगारागारचारुवेसा जाव कलिया रंगट्ठाणंसि जणसयाउलंसि जणसयसहस्सा. बत्तीसइविहस्सनट्टस्स अन्नयरंनट्टविहिउवदंसेजा, सेनूणंगोयमा! तेपेच्छगातंनट्टियं अणिमिसाए दिट्ठीए सव्वओसमंतासमभिलोएंति?, हंतासमभिलोएंति, ताओणंगोयमा! दिट्ठीओतंसि नट्टियंसि सव्वओसमंतासंनिपडियाओ?, हंता सन्निप०, अत्थिणंगोयमा! ताओ दिट्ठीओ तीसे नट्टियाए किंचिवि आबाहं वा वाबाहं वा उप्पाएंति छविच्छेदंवा करेंति?,णो ति० स०, अहवासा नट्टिया तासिं दिट्ठीणं किंचि आ० वा वा० वा उप्पाएंति छवि० वा करेइ?, णो ति० स०, ताओ वा दिट्ठीओ अन्नमन्नाए दिट्ठीए किंचि आ० वा वा० वा उप्पाएंति छवि० वा करेंति?, णोति० स०, से तेणटेणं गोयमा! एवं वु० तं चेव जाव छविच्छेदंवा करेंति // सूत्रम् 422 // 22 लोगस्सणं भंते! एगंमि आगासपए जहन्नपए जीवपएसाणं उक्कोसपए जीवपएसाणंसव्वजीवाण य कयरे 2 जाव विसेसाहिया वा?, गोयमा! सव्वत्थोवा लोगस्स एगंमि आगासपएसे जहन्नपए जीवपएसा, सव्वजीवा असंखेजगुणा, उक्कोसपए जीवपएसा धिकारः। सूत्रम् 421 लकिालीकविस्तारप्रश्रा:। बलिपिडप्रक्षेपादिदृष्टान्ताः / सूत्रम् 422 एकाकाशप्रदेशावगाहे जीवसम्बद्धत्व परस्परपीडाऽभावादिप्रश्ना:। सूत्रम् 423 एकाकाशप्रदेशे जीवप्रदेशानामल्पबहवादिप्रश्नाः। निगोदषट्त्रिंशिका। // 880 //
SR No.600444
Book TitleVyakhyapragnaptisutram Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDivyakirtivijay
PublisherShripalnagar Jain Shwetambar Murtipujak Derasar Trust
Publication Year2012
Total Pages574
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size15 MB
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