________________ श्रीभगवत्यङ्गं श्रीअभय वृत्तियुतम् भाग-२ // 873 // विच्छिन्ने मज्झे संखित्ते जहा सत्तमसए पढमुद्देसए जाव अंतं करेंति / 10 अलोए णं भंते! किंसं०प०?, गोयमा! झुसिरगोलसं० प०॥११ अहेलोगखे० णं भंते! किंजीवाजीवदेसाजीवपएसा? एवं जहा इंदा दिसा तहेव निरवसेसं भाणियव्वं जाव अद्धासमए। 12 तिरियलोयखे० णं भंते! किंजीवा०?, एवं चेव, एवं उड्डलोयखेत्तलोएवि, नवरं अरूवी छव्विहा अद्धासमओ नत्थि॥१३ लोए णंभंते! किंजीवा जहा बितियसए अत्थिउद्देसए लोयागासे, नवरं अरूवी सत्तविजाव अहम्मत्थिकायस्सपएसानो आगासत्थिकाये आगासत्थिकायस्स देसे आगासत्थिकायपएसा अद्धासमए सेसं तं चेव // 14 अलोए णं भंते! किं जीवा०?, एवं जहा अत्थिकायउद्देसए अलोयागासे तहेव निरवसेसंजाव अणंतभागूणे // 15 अहेलोगखेत्तलोगस्सणं भंते! एगंमि आगासपएसे किं जीवा जीवदेसा जीवप्पएसा अजीवा अजीवदेसा अजीवपएसा?, गोयमा! नो जीवा जीवदेसावि जीवपएसावि अजीवावि अजीवदेसावि अजीवपएसावि, जे जीवदेसा ते नियमा एगिदियदेसा 1 अहवा ए०देसा य बेइंदियस्स देसे 2 अहवा ए०देसा य बेइंदियाण य देसा 3 एवं मज्झिल्लविरहिओजाव अणिदिएसुजाव अहवाए०देसा य अणिंदियदेसा य, जे जीवपएसा ते नियमा ए०पएसा 1 अहवा ए०पएसा य बेंदियस्स पएसा 2 अहवा ए०पएसा य बेइंदियाण य पएसा 30 एवं आइल्लविरहिओ जाव पंचिंदिएसु अणिदिएसुतियभंगो, जे अजीवा ते दुविहा पन्नत्ता, तंजहा- रूवी जीवा य अरूवी अजीवा य, रूवी तहेव, जे अरूवी अजीवा ते पंचविहा प०, तंजहा-नो धम्मत्थिकाए धम्मत्थिकायस्स देसे १धम्मत्थिकायस्स पएसे 2 एवं अहम्मत्थिकायस्सवि 4 अद्धासमए५।१६ तिरियलोगखेत्तलोगस्सणं भंते ! एगंमि आगासपएसे किंजीवा०?, एवं जहा अहोलोगखेत्तलोगस्स तहेव, एवं उडलोगखेत्तलोगस्सवि, नवरं अद्धासमओ नत्थि, अरूवी चउव्विहा / लोगस्स जहा अहेलोगखेत्तलोगस्स एगंमि आगासपएसे॥ 17 अलोगस्सणं भंते! एगंमि आगासपएसे पुच्छा, गोयमा! नोजीवा नो जीवदेसातंचेव जाव अणंतेहिं अगुरुयलहुयगुणेहिं संजुत्ते 11 शतके उद्देशक: 10 लोकाधिकारः। सूत्रम् 420 लोकस्यक्षेत्रादिअधोक्षेत्रादिभेदप्रभेदादि तेषांसंस्थानजीवरूपादि, एकाकाशप्रदेशे जीवादि, द्रव्यतोलोकादिप्रश्नाः / // 873 //