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________________ श्रीभगवत्यङ्गं श्रीअभय वृत्तियुतम् भाग-२ // 860 // कन्निएणं भंते! एगपत्तए किं एगजीवे.?, एवं चेव निरवसेसं भाणियव्वं / सेवं भंते! रत्ति॥सूत्रम् 415 // 11-7 // नलिणे णं भंते! एगप० किं एगजीवे अणेग०?, एवं चेव निर० जाव अणंतक्खुत्तो॥सेवं भंते! रत्ति // सूत्रम् 416 // 11-8 // शालूकोद्देशकादयः सप्तोद्देशकाः प्राय उत्पलोद्देशकसमानगमाः, विशेषः पुनर्यो यत्र स तत्र सूत्रसिद्ध एव, नवरं पलाशो देशके यदुक्तं देवेसु न उववजंति त्ति तस्यायमर्थः, उत्पलोद्देशके हि देवेभ्य उद्वृत्ता उत्पल उत्पद्यन्त इत्युक्तमिह तु पलाशे नोत्पद्यन्त इति वाच्यम्, अप्रशस्तत्वात्तस्य, यतस्ते प्रशस्तेष्वेवोत्पलादिवनस्पतिषूत्पद्यन्त इति / तथा लेसासु त्ति लेश्याद्वार इदमध्येयमिति वाक्यशेषः,तदेव दर्श्यते ते ण मित्यादि, इयमत्र भावना, यदा किल तेजोलेश्यायुतो देवो देवभवादुद्वृत्त्य वनस्पतिषूत्पद्यते तदा तेषु तेजोलेश्या लभ्यते, न च पलाशे देवत्वोद्वृत्त उत्पद्यते पूर्वोक्तयुक्तेः, एवं चेह तेजोलेश्या न संभवति, तदभावादाद्या एव तिम्रो लेश्या इह भवन्ति, एतासु च षड्विंशतिर्भङ्गकाः, त्रयाणां पदानामेतावतामेव भावादिति // 411 // एतेषु चोद्देशकेषु नानात्वसङ्गहार्थास्तिम्रो गाथाः, सालंमि धणुपुहत्तं होइ पलासे य गाउयपुहत्तं / जोयणसहस्समहियं अवसेसाणं तु छण्हपि॥१॥ कुंभीए नालियाए वासपुहत्तं ठिई उ बोद्धव्वा / दस वाससहस्साई अवसेसाणं तु छण्हपि // 2 // कुंभीए नालियाए होंति पलासे य तिन्नि लेसाओ। चत्तारि उ लेसाओ अवसेसाणं तु पंचण्हं // 3 // 412-416 // एकादशशते द्वितीयादयोऽष्टमान्ताः॥ 11-(2-8) 11 शतके - उद्देशकाः२-८] शालूकपलाशाघधिकारः। सूत्रम् 410-411 शालूकपलाशकुंभीकानामेकनेकजीवत्वादिउत्पलवत्प्रश्नाः। सूत्रम् 412-416 कुंभीकनालिकापद्यकर्णिकानलीनानामेकनेकजीवत्वादिउत्पलवत्प्रश्नाः। // 860 // 0 शाले धनुःपृथक्त्वं भवति पलाशे च गव्यूतपृथक्त्वम् / योजनसहस्रमधिकमवशेषाणां तु षण्णामपि // 1 // कुंभ्यां नालिकायां वर्षपृथक्त्वं तु स्थितिर्बोद्धव्या। दश वर्षसहस्राणि, अवशेषाणां तु षण्णामपि // 2 // कुंभ्यां नालिकायां भवन्ति पलाशे च तिम्रो लेश्याः। चतस्रो लेश्यास्तु, अवशेषाणां पञ्चानां तु // 3 //
SR No.600444
Book TitleVyakhyapragnaptisutram Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDivyakirtivijay
PublisherShripalnagar Jain Shwetambar Murtipujak Derasar Trust
Publication Year2012
Total Pages574
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size15 MB
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