________________ श्रीभगवत्यङ्ग श्रीअभय. वृत्तियुतम् भाग-२ // 738 // एवं जहा सक्कर० वत्तव्वया भणिया तहा सव्वपुढवीणं भाणियव्वा जाव अहवा दो तमाए एगे अहेसत्त० होजा, 4-4-3-3-2-21-1 (42) अहवा एगे रयण एगे सक्कर० एगे वालुय होज्जा 1 अ० एगे रयण० एगे सक्कर एगे पंक० होज्जा 2 जाव अहवा एगे रयण एगे सक्कर एगे अहेसत्त० होज्जा 5 अ० एगे रयण० एगे वालुय० एगे पंक० होज्जा 6 अ० एगे रयणप्पभाए एगे वालुय (यए) एगे धूम होज्जा 7 एवं जाव अ० एगेरयण एगेवालुप० एगे अहेसत्त० होज्जा 9, अ० एगे रयण एगे पंक० एगे धूम होज्जा 10 जाव अ० एगे रयण एगे पंकप्पभाए एगे अहेसत्त० होज्जा 12 अ० एगे रयण० एगे धूमप्पभाए एगे तमाए होजा 13 अ० एगे रयण एगे धूम० एगे अहेसत्त होज्जा 14 अ० एगे रयण० एगे तमाए एगे अहेसत्त होज्जा 15 अ० एगे सक्कर० एगे वालुय० एगे पंक० होज्जा 16 अ० एगे सक्कर एगे वालुय० एगे धूम होज्जा 17 जाव अ० एगे सक्कर० एगे वालुय० एगे अहेसत्त० होज्जा 19 अ० एगे सक्कर० एगे पंक एगे धूमप्पभाए होज्जा 20 जाव अ० एगे सक्कर एगे पंक० एगे अहेसत्त होज्जा 22 अ० एगे सक्कर० एगे धूम० एगे तमाए होज्जा 23 अ० एगे सक्कर एगे धूमप्प० एगे अहेसत्त० होज्जा 24 अ० एगे सक्कर० एगे तमाए एगे अहेसत्त० होज्जा 25 अ० एगेवालुय० एगे पंक० एगे धूम होजा 26 अ० एगे वालुयप्पभाए एगे पंक० एगे तमाए होज्जा 27 अ० एगे वालुय० एगे पंकप्पभाए एगे अहेसत्त० होज्जा 28 अ० एगे वालुय० एगे धूम० एगे तमाए होज्जा 29 अ० एगे वालुय० एगे धूम० एगे अहेसत्त० होज्जा 30 अ० एगे वालुयप्पभा(याए)एएगे तमाए एगे अहेसत्त होज्जा 31 अ० एगे पंकप्पभा(पंकाए)एएगे धूमप्पभा(धूमाए)एएगे तमाए होज्जा 32 अ० एगे पंक० एगे धूम० एगे अहेसत्त० होज्जा 33 अ० एगे पंक० एगे तमाए एगे अहेसत्त० होज्जा 34 अ० एगे धूम० एगे तमाए एगे अहेसत्त० होज्जा 35 // 14 चत्तारि भंते! ने० नेरइयपवेसणएणं पविस० किं रयणप्पभाए होजा? पुच्छा, गंगेया! रयण वा होज्जा जाव अहेसत्तमाए वा होज्जा 7, अ० एगे रयण तिन्नि सक्कर होज्जा अ० एगे रयण तिन्नि वालुयप्पभाए होज्जा एवं जाव अ० एगे ९शतके उद्देशकः 32 गाड्याधिकारः। सूत्रम् 373 (अपूर्णम्) प्रवेशनकप्रकारप्रश्नः। नैरयिकप्रवेशनके, एकद्वित्रिचतुर्नारकजीवप्रवेशनके विविधभङ्गप्रश्नाः / // 738 //