________________ श्रीभगवत्यङ्गं श्रीअभय. वृत्तियुतम् भाग-२ // 665 // चउरिदियतिरिक्खजोणिय० (एवं चउरिंदिया।२७ तिरिक्खजोणिय), 27 पंचिंदियओ०बंधेणं भंते! कस्स कम्मस्स उदएणं?, एवं चेव, 28 मणुस्सपंचिंदियओ०बंधेणं भंते! कस्स कम्मस्स उदएणं?, गोयमा! वीरियसजोगसद्दव्वयाए पमादपच्चया जाव आउयंच पडुच्च मणुस्सपंचिंदियओरालियसरीरप्पयोगनामाए(नाम) कम्मस्स उदएणं 29 ओ०बंधेणं भंते! किं देसबंधे सव्वबंधे?, गोयमा! देसबंधेवि सव्वबंधेवि, 30 एगिदियओ०बंधे णं भंते! किं देसबंधे सव्वबंधे?, एवं चेव, एवं पुढविकाइया, एवं जाव मणुस्सपंचिंदियओ०बंधेणं भंते! किं देसबंधे सव्वबंधे?, गोयमा! देसबंधेवि सव्वबंधेवि।सूत्रम् 347 // ___31 ओरालियसरीरप्पयोगबंधे णं भंते! कालओ केवच्चिरं होइ?, गोयमा! सव्वबंधे एक्कं समयं, देसबंधे जह० एवं समयं उक्को० तिन्नि पलिओवमाईसमयऊ(यू)णाई, 32 एगिदियओ०बंधेणं भंते! कालओ के होइ?, गोयमा! सव्वबंधे एक्कं समयं देसबंधे जह० एवं समयं उक्को० बावीसं वाससहस्साइंसमऊणाई, 33 पुढविकाइयएगिदियपुच्छा, गोयमा! सव्वबंधे एवं समयं देसबंधे जह खुड्डागभवग्गहणं तिसमयऊणं, उक्को० बावीसं वाससहस्साइंसमऊणाई, एवं सव्वेसिं सव्वबंधो एवं समयं देसबंधो जेसिं नत्थि वेउव्वियसरीरंतेसिंजह खुड्डागं भवग्गहणं तिसमयऊणं उक्को जा जस्स (उक्कोसिया) ठिती सा समऊ(यू)णा कायव्वा,0 जेसिंपुण अत्थि वेउब्वियसरीरंतेसिं देसबंधोजह० एवं समयं उक्को० जा जस्स ठिती सा समऊणा कायव्वा जाव मणुस्साणंदेसबंधे जह एवं समयं उक्को तिन्नि पलिओवमाइं समयूणाई॥३४ ओरालियसरीरबंधंतरे(रं) णं भंते! कालओ के० होइ?, गोयमा! सव्वबंधंतरंजह खुड्डागंभवग्गहणं तिसमयऊणं(ति उक्को०) उक्को० तेत्तीसं सागरोवमाइंपुव्वकोडिसमयाहियाई, देसबंधतरं जह एवं समयं उक्को० तेत्तीसं सागरोवमाइं तिसमयाहियाई, 35 एगिदियओरालियपुच्छा, गोयमा! सव्वबं० जह० खुड्डागं भवग्गहणं तिसमयऊणं उक्को० बावीसंवाससहस्साइंसमयाहियाई, देसबं० जह० एवं समयं उक्को० अंतोमुत्तं, 36 पुढविक्काइय 8 शतके उद्देशक:९ प्रयोगबन्धाघधिकारः। सूत्रम् 347-348 शरीरप्रयोगबन्दस्यौदा| रिकादि एकेन्द्रियो० आदिभेदप्रभेद तस्यदेशादिबन्ध कालान्तरादिप्रश्नाः। // 665 //