________________ श्रीभगवत्यङ्गं श्रीअभय वृत्तियुतम् भाग-२ // 661 // १कइविहे णं भंते! बंधे पण्णत्ते?, गोयमा! दुविहे बंधे प०, तंजहा-पयोगबंधे य वीससाबंधे य॥सूत्रम् 345 // 2 वीससाबंधेणंभंते! कतिविहे पण्णत्ते?, गोयमा! दुविहे प०, तंजहा-साइयवीससाबंधे अणाइयवी० य।३ अणाइयवीससाबंधे णं भंते! कति प०?, गोयमा! तिविहे प०, तंजहा- धम्मत्थिकायअन्नमन्नअणादीयवीससाबंधे अधम्मत्थिकायअन्नमन्नअणा० आगासत्थिकायअन्नमन्नअणा०। 4 धम्मत्थिकायअन्नमन्नअणा० णं भंते! किं देसबंधे सव्वबंधे?, गोयमा! देसबंधे नो सव्वबंधे, एवं चेव अधम्मत्थिकायअन्नमन्नअणा०वि, एवमागासत्थिकायअन्नमन्नअणा०।५धम्मत्थिकायअन्नमन्नअणाइयवीससाबंधे णं भंते! कालओ केवच्चिर होइ?, गोयमा! सव्वद्धं, एवं अधम्मत्थिकाए, एवं आगास०।६सादीयवीससाबंधे णं भंते! कतिविहे प०?, गोयमा! तिविहे प०, तंजहा- बंधणपच्चइए भायणप० परिणामप०। 7 से किं तं बंधणपच्चइए?, 2 जनं परमाणुपुग्गला दुपएसिया तिपएसिया जाव दसपए० संखेज्जपए० असंखेजपए०, अणंतपएसियाणं भंते! खंधाणं वेमायनिद्धयाए वेमालुक्खयाए वेमायनिद्धलु० बंधणपच्चएणं बंधे समुप्पज्जइ जह० एवं समयं उक्को० असंखेनं कालं, सेत्तं बंधणपञ्चइए।८ से किं तं भायणप०?, भा०२ जन्नं जुन्नसुराजुन्नगुलजुन्नतंदुलाणंभायणपच्चइएणं बंधे समुप्पज्जइ जह० अंतोमुहत्तं उक्को० संखेनं कालं, सेत्तं भायणप० / 9 से किं तं परिणामप०?, परिणामप० जन्नं अब्भाणं अब्भरुक्खाणं जहा ततियसए (श०३ उ०७ सू०३)जाव अमोहाणं परिणामपच्चइएणं बंधे समुप्पज्जइ जह० एवं समयं उक्को छम्मासा, सेत्तं परिणामप०, सेत्तं सादीयवीससाबंधे, सेत्तं वीससाबंधे॥ सूत्रम् 346 // 1 कइविहे ण मित्यादि 'बंधे'त्ति बन्धः पुद्गलादिविषयः सम्बन्धः पओगबंधे य त्ति जीवप्रयोगकृतः, वीससाबंधे य त्ति स्वभावसंपन्नः // 345 // 8 शतके उद्देशकः 9 प्रयोगबन्याघधिकारः। सूत्रम् 345 प्रयोगविससाबन्धप्रश्नः। सूत्रम् 346 सादिविनसादिभेदभाजनप्रत्ययादिप्रभेदप्रश्नाः / // 661 //