________________ श्रीभगवत्यई श्रीअभय. वृत्तियुतम् भाग-२ // 643 // जहा से तत्थ आणा सिया आणाए वव० पट्ठ०,णो य से तत्थ आणा सिया जहा से तत्थ धारणा सिया धारणाएणं वव० पट्ठ०, णो य से तत्थ धा० सिया जहा से तत्थ जीए सिया जीएणं वव० पट्ठ०, इच्चेएहिं पंचहिं वव० पट्ठ०, तंजहा- आगमेणं सुएणं आणाए धारणाए जीएणं, जहा 2 से आगमे सुए आणा धारणा जीएतहा 2 वव० पट्ठ०॥८से किमाहुभंते!, आगमबलिया समणा निग्गंथा इच्चेतं पंचविहं वव० जया 2 जहिं 2 तहा 2 तहिं 2 अणिस्सिओवसितं सम्मं ववहरमाणे समणे निग्गंथे आणाए आराहए भवइ॥ सूत्रम् 340 // ९कइविहे णं भंते! बंधे पण्णत्ते?, गोयमा! दुविहे बंधे प०, तंजहा-ईरियावहियाबंधे य संपराइयबंधे य / 10 ईरियावहियण्णं भंते! कम्मं किं नेरइओ बंधइ तिरिक्खजोणिओ बं० तिरिक्खजोणिणी बं० मणुस्सोबं० मणुस्सी बं० देवोबं० देवी बं०?, गोयमा! नो नेरइओ बं० नो तिरिक्खजोणीओ बं० नो तिरिक्खजोणिणी बं० नो देवो बं० नो देवी बं० पुव्वपडिवन्नए पडुच्च मणुस्सा य मणुस्सीओ य बं० पडिवज्जमाणए पडुच्च मणुस्सो वा बं०१ मणुस्सी वा बं० 2 मणुस्सा वा बंधति 3 मणुस्सीओ वा बं० 4 अहवा मणुस्सो य मणुस्सी य बं०५ अहवा मणुस्सो य मणुस्सीओ य बंधन्ति 6 अहवा मणुस्सा य मणुस्सी य बं०७ अहवा मणुस्सा य मणुस्सीओ य बं०॥ 11 तं भंते! किं इत्थी बंधइ पुरिसो बं० नपुंसगो बं० इत्थीओ बंधन्ति पुरिसा बं० नपुंसगा बंधन्ति नोइत्थीनोपुरिसोनोनपुंसओबंधइ?, गोयमा! नो इत्थी बं० नोपुरिसोबं० जाव नो नपुंसगा बंधन्तिपुव्वपडिवन्नए पडुच्च अवगयवेदा बं०, पडिवजमाणए यप० अवगयवेदोवा बं० अवगयवेदा वा बंधंति / 12 जइ भंते! अवगयवेदो वाबं० अवगयवेदावाबं० ते भंते! किं इत्थीपच्छाकडो बं० पुरिसपच्छाकडो बं० 2 नपुंसकपच्छाकडो बं०३ इत्थीपच्छाकडा बंधंति 4 पुरिसपच्छाकडावि बं०५ नपुंसगपच्छाकडावि बं०६ उदाहु इत्थिपच्छाकडो य पुरिसप० य बं० 4 उदाहु इत्थीप० य णपुंसगप० य बं० 4 उदाहु पुरिसप० य ८शतके उद्देशकः 8 गुरुप्रत्यनीकाघधिकारः। सूत्रम् 340 आगमश्रुताssज्ञाधारणाजीतेति पञ्चव्यवहारस्तत्फलप्रश्नाः। सूत्रम् 341 ऐयोपथिकसाम्परायिक द्विविधबन्धप्रश्नः / नैरयिकादीनां बन्धः / वेदापेक्षकालापेक्षसादिसपर्यवसितादि तद्भङ्गकप्रश्नाः। // 643 //