________________ श्रीभगवत्यङ्गं श्रीअभय वृत्तियुतम् भाग-१ // 301 // जाव सोहम्मो कप्पो / सेवं भंते! 2! त्ति ॥सूत्रम् १४९॥चमरो समत्तो॥३-२॥ 30 किं पत्तियण्ण मित्यादि, तत्र किंपत्तियं ति कः प्रत्ययः कारणं यत्र तत् किंप्रत्ययम्, अहुणोववण्णाणं ति, उत्पन्नमात्राणां चरिमभवत्थाण वत्ति भवचरमभागस्थानाम्? च्यवनावसर इत्यर्थः॥१४९॥ इति तृतीयशते द्वितीयश्चमराख्यः॥३-२॥ ॥तृतीयशतके तृतीयोद्देशकः॥ द्वितीयोद्देशके चमरोत्पात उक्तः, स च क्रियारूपोऽतः क्रियास्वरूपाभिधानाय तृतीयोद्देशकः, सच तेणं कालेणं 2 रायगिहे नामनगरे होत्था जाव परिसा पडिगया। तेणं कालेणं 2 जाव अंतेवासी मंडियपुत्तेणामं अण. पगतिभद्दए जाव पञ्जुवासमाणे एवं व०-१ कति णं भंते! किरियाओ पण्णत्ताओ?, मंडियपुत्ता! पंच किरियाओ प०, तंजहा- काइया अहिगरणिया पाउसिया पारियावणिया पाणाइवायकिरिया।२काइया णं भंते! किरिया कतिविहा पण्णत्ता?, मंडियपुत्ता! दुविहा पण्णत्ता, तंजहा- अणुवरयकायकिरिया य दुप्पउत्तकायकिरिया य। 3 अहिगरणिया णं भंते! किरिया कति०प०?, मंडियपुत्ता! दुविहा प०, तंजहा- संजोयणाहिगरणकिरिया य निव्वत्तणाहिगरणकिरिया य। 4 पाओसिया णं भंते! किरिया कति प०?, मंडियपुत्ता! दुविहा प०, तंजहा- जीवपाओ० य अजीवपादो० य / 5 पारियावणिया णं भंते! किरिया कइ०प०?, मंडियपुत्ता! दुविहा प०, तंजहा-सहत्थपारिया य परहत्थपारियावणिया य।६पाणाइवायकिरिया णं भंते! पुच्छा, पाणाइवायकिरिया कइ० प०?, मंडियपुत्ता! दुविहा प०, तंजहा-सहत्थपा० परहत्थपा० किरिया य / / सूत्रम् 150 // तेणं कालेण मित्यादि 1 तत्र पंच किरियाओ त्ति करणं क्रिया कर्मबन्धनिबन्धना चेष्टेत्यर्थः काइय त्ति चीयत इति कायः 3 शतके उद्देशकः२ सूत्रम् 149 असुराणामूइंगतिहेतुः प्रश्नः / उद्देशकः३ क्रियाप्ररूपणाधिकारः। सूत्रम् 150 कायिक्यादिपञ्चक्रियाभेदप्रभेदे मण्डितपुत्र प्रश्नाः / // 301 //