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________________ | श्रीअनुयोग द्वारंमलधारि | श्रीहेमचन्द्रसूरि वृत्तियुतम्। // 292 // सूत्रम असुरकुमारी(र देवी)णं भंते! देवीणं केवतिकालं ठिती पं०?, गोo! जहन्नेणं दस वाससहस्साइंउक्कोसेणं अद्धपंचमाई, पलिओव- 8 [1] उपक्रमः। शा० उपक्रमः। माई, (2) नागकुमाराणं ( भते! केव० पं०?), जाव गो०! जहन्नेणं दस वाससहस्साई उक्कोसेणं देसूणाई दोण्णि पलिओवमाई। १.३प्रमाणम्। नागकुमारीणं (भंते! केव० पं०?), जाव गो० जहन्नेणं दसवाससहस्साई, उक्कोसेणं देसूणं पलिओवमं (3) एवं जहाणागकुमाराणं द्रव्यादिचतुर्भेदाः देवाणं देवीण यतहा जाव थणियकुमाराणं देवाणं देवीण य भाणियव्वं / / सूत्रम् 384 // 384-391 (1) पुढवीकाइयाणं भंते! केवतिकालं ठिती पन्नत्ता? गो! जह० अंतोमु० उक्को० बावीसं वाससहस्सा। सुहमपुढविकाइयाणं 1.3.3 ओहियाणं अपज्जत्तयाणं पज्जत्तयाण यति(ण्णि)ण्हवि पुच्छा, गो०!जह० अंतोमुहत्तं उक्कोसेणवि अंतोमुहत्तं / बादरपुढविकाइयाणं कालप्रमाणम्। पुच्छा, गो० जहन्नेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं बावीसं वाससहस्साई। अपज्जत्तय बादरपुढविकाइयाणं पुच्छा, गो०! जहण्णेण(वि) विभा०नि० अं० उक्कोसेणवि अं०। पज्जत्तगबादरपुढविकाइयाणं (पुच्छा), जाव गो! जहं० अंतोमुहत्तं उक्को० बावीसं वाससहस्साइं अंतो- औप० कालः। मुहत्तूणाई, (2) एवं सेसकाइयाणंपि पुच्छावयणं भाणियव्वं, आउकाइयाणं जाव गो० जहं० अंतो० उक्कोसे० सत्त वाससहस्साई। ii.अद्धापल्योपम सुहुमआउकाइ० ओहिआणं अपज्जत्तयाणं पज्जत्तयाणं तिण्हवि जहण्णेणवि अंतो उक्कोसेणवि अं० / बादरआउका० जाव गो० सागरोपमयोर सुरकुमारादिशेष जहा ओहियाणं, अपज्जत्तगबादरआउकाइयाणं जाव गो० जहन्नेणवि अंतो० उक्कोसेणवि अं०।पज्जत्तगबादरआउकाइयाणं जाव दण्डकानामायु:गो० जहं० अंतोमुहत्तं उक्को० सत्त वाससह अंतोमुहत्तूणाई। (3) तेउकाइयाणं भंते जाव गो० जहं० अं० उक्को० तिण्णि राइंदियाई। स्थिति द्वारेण सुहुमते० ओहियाणं अपज्जत्तयाणं पज्जत्तयाण तिण्हवि जहण्णेणवि अंतो० उक्कोसेणवि अं०। बादरतेउकाइयाणं भंते! जाव गो० // 292 // 0 कौंसान्तर्गता:पाठा मुद्रित प्रतानुसारेण ज्ञातव्याः। तदनुसारेणाक्षराणां सङ्कलना यथायोग्यं कर्त्तव्या। 0 दु।०के०' इति रूपेण संक्षिप्तं पाठो वर्तते / एवमग्रेऽपि 'अंतोमहत्तं' स्थाने 'अंक' वाससहस्साई स्थाने 'वा०' तथा 'वाउका०', ते०, इत्यादि संक्षिप्ताः पाठा: वर्तन्ते। 0 सहस्साई। 7 वी। 0गा। कथनम्।
SR No.600442
Book TitleAnuyogdwar Sutram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDivyakirtivijay
PublisherShripalnagar Jain Shwetambar Murtipujak Derasar Trust
Publication Year2012
Total Pages450
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_anuyogdwar
File Size31 MB
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