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________________ [[1] उपक्रमः। शा० उपक्रमः। श्रीअनुयोगद्वारंमलधारि श्रीहेमचन्द्रसूरि वृत्तियुतम्। // 191 // 1.2 नाम। सूत्रम् 248-250 1.2.6 षइनाम। 1.2.6.5 पारिणामिक नीयाः। नवरंबालाअविरताः, पण्डिताः साधवः, बालपण्डितास्तु देशविरताः। तेषां यथास्वं वीर्यलब्धिर्वीर्यान्तरायकर्मक्षयोपशमाद्भावनीया। इन्द्रियाणि चेह लब्ध्युपयोगरूपाणि भावेन्द्रियाणि गृह्यन्ते। तेषांचलब्धि र्योग्यता मतिश्रुतज्ञानचक्षुरचक्षुर्दर्शनावरणक्षयोपशमजन्यत्वात्क्षायोपशमिकीति भावनीयम्। आचारधरत्वादिपर्यायाणां च श्रुतज्ञानप्रभवत्वात्तस्य च तदावरणकर्मक्षयोपशमसाध्यत्वादाचारधरादिशब्दा इह पठ्यन्त इति प्रतिपत्तव्यम् / से तमित्यादि निगमनद्वयम् // 247 // अथ पारिणामिकभावमाश्रित्याह से किंतं पारिणामिए? 2 दुविहे पण्णत्ते, तंजहा, सादिपारिणामिए य 1 अणादिपारिणामिए य २॥सूत्रम् 248 // से किंतं सादिपारिणामिए? 2 अणेगविहे पण्णत्ते तंजहा, जुण्णसुरा जुण्णगुलो जुण्णघयं जुण्णतंदुला चेव / अन्भाय अब्भरुक्खा संझा गंधव्वणगरा य॥२४॥ उक्कावाया दिसादाघा गजियं विजूणिग्घाया जूवया जक्खालित्ता धूमिया महिया रयुग्घाऔं चंदोवरागा सूरोवरागा चंदपरिवेसा सूरपरिवेसा पडिचंदया पडिसूरया इंदधणू उदगमच्छा कविहसिया अमोहा वासा वासधरा गामा णगरा घरा पव्वता पायाला भवणा निरया रयणप्पभा सक्करप्पभा वालुयप्पभा पंकप्पभा धूमप्पभा तमा तमतमा सोहम्मे ईसाणे जाव आणए पाणए आरणे अचुए गेवेज्जे अणुत्तरोववाइया ईसिपब्भारा परमाणुपोग्गले दुपदेसिए जाव अणंतपदेसिए, से तं सादिपारिणामिए।सूत्रम् 249 // से किं तं अणादिपारिणामिए? 2 धम्मत्थिकाए अधम्मत्थिकाए आगासत्थिकाए जीवत्थिकाए पोग्गलत्थिकाए अद्धासमए ७'हा' एवमग्रेऽपि चतुर्ध्वपि पदेषु / 7 दिया / चंदा। 9 रा। तमप्पहा तमतमप्पहा। ईसाणे, जाव आणए पाणए आरणे' इत्यादिपदानि न वर्तन्ते / अणुत्तरे / रुप्पभारा / पु। साधनादिभेद निरूपणम् // 191 //
SR No.600442
Book TitleAnuyogdwar Sutram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDivyakirtivijay
PublisherShripalnagar Jain Shwetambar Murtipujak Derasar Trust
Publication Year2012
Total Pages450
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_anuyogdwar
File Size31 MB
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