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________________ मविण्यद चरित्रम एकादशमोड धिकारः मुवंशजां परं वक्त्रं, सगुणां मुतनोस्तनुं / पश्यन् कोदण्डभीत्येव, स्मरवश्यः पियो न किम् // 15 // तवांगसामादभूषा, लक्ष्मीरस्तु फलेग्रहिः / मणीनां स्वर्णसानिध्ये, विधेया परिधेयता // 66 // सख्याऽप्युदीरिता साक्षान्मृगाक्षी चिरमज्जनः / स्नपिता चन्दनालिप्ताऽऽभरणानि बभार सा // 67 // यथास्थलं विनिहितैर्भूषणैर्व्यरुचत्तरां / आरामभूरिव माप्त-नानाकुसुमपादपैः // 68 // करागुरुभूमात्य, मृणालेपभाजनैः / सकोण कुसुमैः पायनिभृतमञ्जसा // 69 // तदासवेश्म सम्पाप्य, दम्पती तौ निषीदतुः / पल्या मदतलाके कन्दर्पोन्मादसादरौ // 7 // आलिङ्ग्य मास्नेहाईतनुभिर्यद्रसाम्बुमिः। अन्योऽन्यविषसम्मानि, शमर्यामासतुः क्षणात् // 7 // भावां पुरादिनिष्कान्ती, दैवाद् दुर्जनसातौ / नामद्रां विसस्मार, तदाहं हंत लोलुपा // 72 // उत्तीर्य वाहनात्सयस्तदानयनहेतवे / भवान जगाम तेनाऽभूद्विरहोपद्रवो महान् // 73 // मृपावाक्यैरसभ्मेन, दूषिता दुःखिताऽप्यहं / तेनाऽस्मिन्न पुरे मन्दभाग्या मदधिका हि का // 74 // इत्यालापेमनःशल्यं, पत्युर्नार्या व्यपाकृतं, / ताभ्यां चुम्बनसारः स्यासिक्तः प्रणयपादपः // 75 // ताम्बूलदानैरन्योन्यं, मियः प्रणयवार्तया / चिरं विरहजं दुःखं, विसस्मरतुराशु तौ // 76 // माधाः खेदं सनिर्वेद, मिये ! विरहकातरे।। प्राप्ते नरभवे पुण्यादिष्टयोगो विश्रुम्भते / ' 77 // संपदः परमात्रं नो, दूरे स्युः भाग्यशालिनः / पिनष्टि सर्वाऽनिष्टानि, यदि स्यादर्मसनिधिः // 78 //
SR No.600427
Book TitleBhavishyadutta Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMeghvijay Gani, Mafatlal Zaverchand Gandhi
PublisherMafatlal Zaverchand Gandhi
Publication Year1936
Total Pages170
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size12 MB
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