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________________ भविष्यद चरित्रम सप्तमोऽधिकार 49 जानीमहे महेशस्य, बन्धुदत्तस्य चेष्टितम् / पापे निषक्तचित्तोऽसौ, नोपरन्ता कुकर्मणः // 31 // वणिजामेतदालापं, श्रृण्वन् पापनिषक्तधीः / बन्धुदत्तोऽवदत् सर्वान, किं पोतस्थापनं वृथा // 32 // चलन्तु जलधौ तूर्ग, पूर्ण वित्य न चाऽऽयं / यूयं न्यायदृशं दत्य, परमार्थविवर्जिताः // 33 // . पति मुक्त्वा ररचाऽसौ, जारे मद्वान्धवेना / वञ्चयित्वा च्छ लेनेमां, स प्रत्यगाभिजे पदे // 34 // मया किञ्चिद्धनं दत्वा, रोपिता वहने निजे / स्वीकरिष्याम्य, नारी, को दोषस्तद्वदन्तु मे // 35 // इयत्कालमयं सामनया भोगमाचरन् / गन्तुं स्वगेहे नो शक्तः, स्वजने पङ्क्तिभेदतः // 36 // परमार्थ मया साई, विचार्य कार्यकारिणा / ज्येष्टेन नागतं सार्थे, तकि मेऽवगतं वचः // 37 // मयाऽप्ययं पुरा मुक्तो, वने दुर्मतिमीयिवान् / प्रकाशयति सौजन्यं, तदप्यन्याय केवलम् // 38 // उच्चै?षयते योपा, निर्दोषाऽस्मीति बोधितुम् / या लुप्तशीललीला स्यात् तस्याः सर्वः परो निजः // 39 // चिलम्बेन फलं नो मे, न युष्याकं पयोनिधौ / दैवात्पवनवैगुण्ये, जलोपद्वसम्भवात् // 40 // यानपात्रे निजं वस्तु, स्थापितं जनदर्शने / वश्चनाय स्त्रिया ज्येष्टेनाऽऽकष्ट निशि तत्पुनः // 41 // धनवान् निर्धनो वाऽयं, किमनेन महीयसा / पित्रोः सामनेऽवश्य, कर्ताऽयं वोऽप्युपदकम् // 42 / / तैस्तयेत्युदितेऽचालीद्वहनाली महोदधौ / दैवान्नैवाऽभवत्कोऽपि, स्थातुं तत्र पराक्रमी // 43 // ततो भविष्यदत्तोऽपि, दध्यौ हा ! मम मृढताम् / छलितश्वलितेनाऽग्रेऽनेनाऽहं पशुवत्पुनः // 44 //
SR No.600427
Book TitleBhavishyadutta Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMeghvijay Gani, Mafatlal Zaverchand Gandhi
PublisherMafatlal Zaverchand Gandhi
Publication Year1936
Total Pages170
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size12 MB
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