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________________ भविष्यदत्तचरित्रम् द्वादशमोऽधिकारः दुहिता पिहिताऽऽस्याऽपि, रहो नीत्वा तया भृशम् / शिक्षिताऽभ्यागते पत्यौ, मानं संवृणु साम्पतम् // 105 // बोधिता सरसाऽऽलापैः, सरव्या काचनमालया। एकान्ते कान्तमानीय, कमला परिमीलिता // 106 // अन्योऽन्यस्नेहसम्पूर्णाऽऽलापैराभाष्य दम्पती / विनिन्यतुश्चिरान्मन्युमुचिताचरणोधतौ // 107 // मसाद्य सयः कन्दर्प-प्रसर्पद्वाणसन्निभैः / कटाक्षैरिक्ष्यमाणां तां, श्रेष्ठी मोवाच सादरम् // 108 // भद्रे ! क्षुद्रवचोभिस्त्वं, मयाऽत्रोपद्रुता भृशम् / नाऽऽयासि यदि मे गेहं, तदा मे नास्तिकं जनम् // 109 // इत्युक्त्वा पादयोलग्ने, दयिता हृदयेश्वरे / कमला हृदयानन्दादाललाप सविम्रमम् // 110 // जीवितं मे त्वदायतं, किं करोषि ठ्याऽधुना / चाहनि जीवितेश त्वं, वस्तु लोके न ते परम् // 111 // दम्पती मिलितो मत्वा, लक्ष्मीर्मुदितमानसा / जामातरं वरैर्भोज्य-भॊजयामास सत्वरम् // 112 // भविष्यदत्तं दौहित्रं, सत्कृत्याभरणादिना / कमलां मेषयामास, सोत्सवं सा स्वमन्दिरे // 113 // भविष्याऽपि सुशिष्यावत्तया सममुपेयुषी / माविशद्वासभवनं, कमलाऽनुजया तदा // 114 // कामाच्यवसायेनाऽलङकृतं वासमन्दिरम् / सज्जीकृत्य स्नुषां पाह, याहि वत्से पियालयम् // 115 // . साऽब्रवीदम्ब ! मे कार्य न किंचित्पतिसामे / अन्यासक्तं पति का वा, क्षमाकर्तु रसोन्मुखम् // 116 // तयाऽवाचि सुधावाचि, पिये ! किं मानकारणम् / वत्से नोपानहो त्यागः, साम्पतं नागते जले // 117 // प्रबोध्य वचनैरेवं, प्रेषिता कमलश्रिया / भविष्याऽपि प्रियावास, जगाम कामलालसा // 118 //
SR No.600427
Book TitleBhavishyadutta Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMeghvijay Gani, Mafatlal Zaverchand Gandhi
PublisherMafatlal Zaverchand Gandhi
Publication Year1936
Total Pages170
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size12 MB
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