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________________ क्षत्रियराजपुत्राणां भट्टा बन्धुसमाः स्मृताः // लोकोक्तिरस्ति सर्वत्र ह्यपरं च वदाम्यहम् // 65 // संग्रामे राजपुत्राणां मृतानां दाहको यदि // तत्संबन्धी न कोपि स्यात् तदा भट्टा दहन्ति वै // 66 // | संबंधिनो हि भट्टानां यतस्ते पतिता नृपाः // किंचैते लोकसंसिद्धप्रौढिभावकराः स्मृताः // 7 // शूरसभासु वीराणां संति चर्याप्रकाशकाः // यशःस्फातिकरा स्तेषां भवंति तेन हे प्रिये // 8 // अहं त्वामात्मनो बंधुगृहे मुक्तवाऽस्मि संत्रजन् // अतस्त्वया मनोचिंता कार्या नहि मनागपि // 69 // | इत्यायुक्त्या समाश्वास्य तां मुक्त्वा तत्र बुद्धिमान् // चलितः सदयो हर्षात्प्रतिष्ठानपुरं प्रति // 70 // क्रमेणाथ पुरासन्नतटाकस्य तटे गतः // जलपानाय तत्रासौ ददर्श जलहारिणीः // 71 // Kजलेन हस्तपादादि क्षालयन्तं विलोक्य तम् // जलं पात्रषु गृह्णन्त्य उचतुस्ताः परस्परम् // 72 // एकयोक्तमयं पान्थो भोसख्यः सुमनोहरः॥ हस्तादिक्षालनं कुर्वन् पिबतीदं जलं कथम् // 73 // | परयोक्तं तदा मुग्धे त्वं स्वयं बुद्धियोगतः॥ अत्रत्यापि न जानासि ह्येतावन्मात्रकं कथम् // 74 // स्वपुरादेष आमच्छन् स्वस्त्रियं विरहातुराम् // वारयामास तस्याश्च कज्जलेन समन्वितम् // 75 //
SR No.600423
Book TitleSadaivvatsakumar Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMatisagar, Manishankar Chaganlal Shastri
PublisherRatilal Keshavlal
Publication Year1932
Total Pages196
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size15 MB
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