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________________ हारकथा नकम्. CINERIEGISTEREST एवं संचिन्तयत्येव मयि सा सरसस्ततो। निर्याता तत्तटस्थस्य वटस्याऽयो व्यवस्थिता // 355 // ततश्च तत्क्षणादेव तस्मान् न्यग्रोधपादपाद् / उत्तीर्य गोनसः सर्प-स्तत्समीपमुपागमत् // 356 // कन्यारूपं परित्यज्य नागिनीरूपधारिणी / तेन साधं ततो भोगानसौ भुक्तवती मुदा // 357 // तत्ताहक चेष्टितं दृष्ट्वा पर्यचिन्ति पुनर्मया। धिक् स्त्रीणां चेष्टितं येन प्रसक्तैदृशीदृशि // 358 // अयुक्तं कार्यमेताभ्या-मारल्धं पुरतो मम / यतोऽतो निग्रहं कर्तु-मेतयोयुज्यते मम // 359 // धर्मश्चाऽयं नरेन्द्राणां यदुष्टानां विधीयते / निग्रहोऽत्युप्रदण्डेन शिष्टानां प्रतिपालनम् / / 360 // इति ध्यात्वा सरोमध्यान् निर्गत्य दयिते मया / तत्कशैस्ताडितं बन्दं तावद् यावत् प्रमूर्छितम् // 36 // प्रस्तावेऽत्राऽतिवेगेन मां मदश्वपदाऽनुगा। पताकिन्याऽऽपतत्तत्र श्रीरिव न्यायशालिनम् // 362 // तत्राऽऽकुले मयि क्षिप्रं मनाक तल्लन्धचेतनम् / उत्थाय मिथुनं क्वापि गतं न ज्ञायते प्रिये ! // 36 // ततोऽहमपि वाहिन्या सार्धमागतवान् निज / पुरमेतन् मया कान्ते / वने दृष्टमहोऽद्भुतम् // 364 // श्रा एवं वृत्तान्तमावेद्य प्रियायै वासवेश्मनः / शरीरचिन्तया भूपो बहिर्निगतवाँस्तदा // 365 // तस्मिन् शरहिवा-सहक्कान्त्या दिशो दश / द्योतयन् ददृशे राज्ञा पुरो नागकुमारकः // 366 // प्रणामपूर्वकं तेन राजन् ! विजयतामिति / ब्रुवतोक्तं भूपते ! वः समीपे वयमागताः // 367 //
SR No.600401
Book TitleManipati Rajarshi Charitam
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJambukavi, Bhagwandas Pt
PublisherHemchandra Granthmala
Publication Year1922
Total Pages164
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size11 MB
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