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________________ श्रीअमम ह्यामस्य तेजःप्रयोतिदिशमि कि ? स्वामिलिन्युनवानीमात्र त नाप // 358 // जिनेशचरित्रम् / प्रद्युम्नहरणे सयादवशोकप्रस्ता द्वारिका नारदागमनं दादरममने ऽधस्ताद् व्यभावयत् / बालं बालार्कवत्तेजोनिधिं तं दिव्यमूर्तिकम् // 57 // स सप्रभावं तं ज्ञात्वा मेघकूटे निजे पुरे। नीत्वा कनक- मालायाः पत्न्याः पुत्रतयाऽऽर्पयत् // 58 // जने सोचीकथद्गूढगर्भासीद्दथिता मम / अधुना सुषुवे सूनुं साऽपि सूतिगृहेऽविशत् // 59 / / कृत्वा जन्मोत्सवं मनोः सुदिने संवरोऽकरोत् / प्रद्युम्नाख्यां तस्य तेजःप्रद्योतिदिशस्ततः // 60 // इतश्चागत्य रुक्मिण्याऽप्रच्छि कृष्णः क्व ? नन्दनः / स प्रत्यूचे त्वयाऽऽदायि सम्प्रत्येव कगन्मम // 61 // विप्लावयसि कि ? स्वामिनिन्युक्तोऽथ तया हरिः / उच्चैरूचे वैरिणा धिक्केनापि च्छलितोऽस्मि हा // 62 / / साश्रदृक् सह रामेण पितृभिर्यदुभिस्तथा / सर्वत्रान्वेषयत्पुत्रं वार्तामात्रं तु नाप नः॥६३॥ हा वत्स ! तुच्छभाग्योऽहं हस्ताद्यत्त्वं हृतोऽसि मे / चिन्तामणिरिवाचिन्त्यप्रभावोऽपीह वैरिणा // 64 / / विधे! विधेहि | | मजिह्वासहस्रं युगपद्यथा / अनूद्यानूद्य पुत्रस्य गुणान् खं धारयेऽधुना // 65 / / व्योमेव पर्व विधुनाऽधुना त्यक्तं कलावता। त्वयेदं मन्दिरं पुत्र ! शून्यमेव विभाति मे // 66 / / स्वपुत्रातिभवदुःखग्रन्थिना सर्पता हृदि / क्लुप्तया मूर्च्छया भूमौ लोलुठीति स्म रुक्मिणी // 67 / / लब्धसंज्ञा परिजनैः सार्द्ध तार तथाऽरुदत् / यथाऽरोदि शिलोत्कीण्णैरपि चित्रगतैरपि / / 68 / / प्रद्योतने गते पुत्रे यदुचक्रैरशोच्यत / कृष्णस्याम्लायि कान्ताभिः पद्मिनीभिरिवाभितः // 69 // मुदं कुमुदिनीवैका भामा तु सपरिच्छदा / दधे तदालिसंगीतभं| गीरंगतरंगिता // 70 // युग्मम् / / हा विष्णो प्रभविष्णोरप्यागात्ते व ? नु पौरुपम् / दुःखाचक्रे क्रन्दन्तीति (यादव) साग्रज हरिम् * ||7| विश्रान्तचत्वरकथां निवृत्तोत्सवकौतुकाम् / देवहर्म्यस्थितप्रेक्षां सशोकां द्वारकां तदा // 72 / / प्रेक्ष्य मौलौ सेव्यमानश्छत्रिकाच्छमनेन्दुना। ध्वनन्ती महती हस्ते कृपां च हृदये वहन् // 73 // उत्तीर्य नारदो व्योम्नः कृष्णस्यागात्सभां मुनिः / अस्तोकशोकखिम्नस्य समस्तैर्यादवैः सह // 74 // त्रिभिविः॥ आः किमेतदिति प्रोक्तः कृष्णस्तेनान्वशादिति / जातमात्रं रौक्मिणेयं हस्तान्मे को सर्ग-९ // 358 //
SR No.600400
Book TitleBhavi Jineshwar Amamswami Charitra Mahakavya Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMuniratnasuri, Vijaykumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1943
Total Pages272
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size26 MB
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