SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 104
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ श्रीअमम // 384 // हि // 43 // बहिः पुरादयासिष्टां शिष्टां स्वीकृत्य तौ च ताम् / रुक्मी ततोऽनुतापेनाक्रन्दीदिति च पर्षदि // 44 // हा पुत्रि ! क्रोधच- Sण्डालोनीत्वा मां निजरुपताम् / कृत्वा त्वामपि चण्डाली चण्डालाभ्यामदापयत् // 45 // निरस्य रुक्मिणीपुत्रं पवित्र तीर्थवन्मया / | क्रोधान्धेनान्त्यजगृहे हहा बद्धासि गौरिव // 46 // तारं तारं रुदन्नेवं सोऽश्रौपीत्तूर्यमङ्गलम् / शोकात मयि कुत्रेदमित्यप्राक्षीनियोगिनः // 47|| तेऽप्याख्युनगगद् बाह्ये प्रासादे स्वविमानवत / शच्येव सह दा प्रद्युम्नोऽस्ति सुरेशवत् // 48 // पूर्णपार्श्वस्य शाम्बेन | भात्राऽसौ मागधस्तुतीः / शृण्वन्सङ्गीतकं स्फीतं कारयत्यात्मनोग्रतः॥४९॥ तत्तूर्यवर्यध्वानोऽयं श्रोत्राध्यानं पुनाति ते / देवादु| चितयोगोऽभूत्तत्खेदं मुश्च भूपते ! // 50 // ततो हृष्टो रुक्मीराजस्तावनीय स्वयं गृहे / पूजयामास जामेयजामातुः स्नहतोऽधिकम् | // 51 / रुक्मिणं तावथापृच्छ्य वैदा सह जग्मतुः / द्वारका रुक्मिणीं तत्र नत्वाऽऽनन्दयतां चिरात् / / 52 / / वैदा मूर्तिमत्येव रत्या रेमे सहान्वहम् / प्रद्युम्नः क्वाऽपि योगः स्याद्रूपलावण्यपुण्ययोः // 53 // कन्यामन्यामिव शची हेमाङ्गदमहीपतेः। सुहिरण्याभिधां शाम्बः परिणिन्ये महोत्सवात् // 54 // शाम्बो भामासुतं भी प्रत्यहं क्रीडयन्नहन् / धनं धनं हारयित्वा द्यूतेऽन्येभ्योऽप्यदीदपत् // 55 / / भामायै स रुदन्नाख्यत्साऽपि कृष्णाय सोऽपि च / स्वयं देव्यै जाम्बवत्यै सर्व शाम्बस्य चेष्टितम् / / 56 / / जाम्बवत्यवदन्नाथ सदा शान्तः सुतो मम / इयत्कालं श्रुतो नास्याविनयो दर्श्यतां स वा // 57 / / विष्णुः स्मित्वाऽवदत्सि ही पशुः शान्तं निज सुतम् / मन्यतां त्वादृशी यत्तु मन्यते स्नेह एव सः॥५८।। न चेत्प्रत्येपि देवि! त्वमेहि ते दर्शयाम्यहम् / शाम्बस्वरूपमित्युक्त्वा | स्वयं विद्याबलादभूत् / / 59|| आभीररूपो देवीं चाभीरी चक्रे जनार्दनः। तस्थतुस्तौ पुरीद्वारे तक्रविक्र यहेतवे // 60 // युग्मम् / तौविशन्तौ पुरीं दृष्ट्वा शाम्बः स्वरं परिभ्रमन् / आइत्तक्रक्रयव्याजादाभीरी साऽन्वगाच तम् // 61 / / आभीरोऽप्यन्वगादेतां शाम्बो देव जिनेशचरित्रम् / पश्चात्तापे ज्ञातस्वरूपे तेन गृहमा नीय कृतः सत्कार: प्रद्युम्नस्य ॐ*AEHE सर्ग-९ // 38 //
SR No.600400
Book TitleBhavi Jineshwar Amamswami Charitra Mahakavya Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMuniratnasuri, Vijaykumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1943
Total Pages272
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size26 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy