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संवेगो वि य २, निव्वेओ वि य ३ तहेव अणुकंपा ४ । अस्थिवर्क चेव ५ तहा, सम्पत्ते लरखणा पंच ॥ ९६ ॥ इय पंचगुणविसिटुं, कुग्गहसंकाइसलपरिहीणं । सम्मईसणमणहं, दंसणपडिमा हवइ पढमा ॥ ९७ ॥ नवरं पवित्तगत्तो, जिणपूयं कुणइ तिसुवि संज्झासु । विहिपुच्चमणुढाणं, पच्चक्खाणं च जह सति ॥ ९८ ॥ बीयाए पुण थूलग-पाणिवहाईणि बारस व| याणि | सव्वाइयारसुद्धाई, सावओ धरइ जत्तेण ॥ ९९ ॥ तइयाए सामइयं. सडो गिन्हइ उभयसंज्झास । होइ तहा, पोसहिओ चउसु पव्वेसु ॥ १०० ॥ पंचमियाए सड़ो, एगागी पोसहं गहेऊण । पव्वेसु चउसु पडिमं, पडिवज्जइ सधराईयं || ॥ १०१ ॥ अह कामदेवगिहिणा, पडिमाओ आइमाउ चत्तारि । उच्चहियाओ सम्म, विहीइ सिद्धंतभणियाए । १०२ ॥ सिरि- 151 वीरजिणसय.से, तस्संगीकयगिहित्थधम्मस्स । एवमइक्कंताई, चउदस संखाइँ वरिसाइं ॥१०३ ॥ अन्नदिणे सो पंचमपडिमकए सव्वराइयं पडिमं । पडिवजिऊण रहिओ, पोसहसालाए एगागी ॥ १०४ ॥ इत्थंतरंमि सक्को, अवहीए महियलं निरिक्खंतो। पिक्खेइ कामदेवं, पडिमाइ ठिय महरिसिं व ॥१०५॥ तत्तो विम्हियचित्तो, सक्को कुंभत्थलं व मत्तकरी । धृणं| तो नियसीसं, जंपेइ सुरगणसमक्खं ॥ १०६ ॥ चंपाइ कामदेवो, गिहत्थवयधारगो वि पडिमठिओ। देवेहिं वि झाणाओ,
अचालणिज्जो सुरगिरिव्व ॥ १०७ ॥ अह तत्थ को वि देवो, दुज्जणइव मच्छरी परगुणेसु । तव्यन्त्रणमसहंतो, ईसाइ पयंपए Bा सकं ॥ १०८॥ भावड तं किज्जा, बलिजा जमणस्स पडिहाइ । अलियं पि सञ्चविजर. पहत्तण तेण रमणीयं ।
धाऊहि नद्धअंगो, एस गिहत्थो मणुस्समत्तो वि । तुमए पसंसिओ जं, तं पहु ! कि कोवि सहइ ॥ ११० ॥ एगो वि हु झाणाओ, तमहं लीलाइ चालइस्सामि । ज सेलोवि सुरेडिं, चालिज्जड किन्न परमाणु ॥ १११ ॥ इय भणि सग्गाओ,
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