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________________ व्याख्याप्रज्ञप्तिः अभयदेवीया वृत्तिः ॥५३॥ 4%3AGAR%25A तस्स णं संपरायकिरिया कजइ, नो ईरियावहिया, अहासुत्तं रीयमाणस्स ईरियावहिया किरिया कजइ, उस्सुत्तं रीयमाणस्स संपराइया किरिया कजइ, से णं उस्सुत्तमेव रियति, से तेणटेणं०॥ (सूत्रं २६६) अह भंते! सइंगालस्स सधूमस्स संजोयणादोसदुट्ठस्स पाणभोयणस्स के अट्टे पण्णत्ते ?, गोयमा ! जे णं निग्गंथे वा निग्गंधी वा फासुएसणिज्जं असणपाण ४ पडिगाहित्ता मुच्छिए गिद्धे गढिए अज्झोववन्ने आहारं आहारेति एस णं गोयमा! मइंगाले पाणभोयणे, जेणं निग्गंथे वा निगंधी या फासुएसणिज्नं अमणपाण ४ पडिगाहित्ता महया २ अप्पत्तियकोहकिलाम करेमाणे आहारमाहारेइ एस णं गोयमा! सधूमे पाणभोयणे, जे णं निगंथे वा २ जाव पडिगाहेत्ता गुणुप्पायणहेउं अन्नदब्वेण सद्धिं संजोएत्ता आहारमाहारेइ एस णं गोयमा ! संजोयणादोसदुढे पाणभोयणे, एस णं गोयमा ! सइंगालस्स सधूमस्स संजोयणादोसदुहस्स पाणभोयणस्स अढे पन्नत्ते । अह भंते ! वीतिंगालस्स वीयधूमस्स संजोयणादोसविप्पमुक्कस्स पाणभोयणस्म के अटे पन्नत्ते ?, गोयमा ! जे णं णिग्गंथो वा जाव पडिगाहेत्ता अमुच्छिए जाव आहारेति एस गं गोयमा! वीतिंगाले पाणभोयणे, जे णं निग्गंथे वा निग्गंथी वा जाव पडिगाहेत्ता णो महया अप्पत्तिय जाव आहारेड एस णं गोयमा! वीयधमे पाणभोयणे, जे णं निग्गंथे वा निग्गंथी वा जाव पडिगाहेत्ता जहालद्धं तहा आहारमाहारेइ एम | णं गोयमा ! संजोयणादोसविप्पमुक्के पाणभोयणे, एस णं गोयमा! वीतिंगालस्म वीयधूमस्स संजोयणादोसविप्पमुक्कस्स पाणभोयणस्त अहे पन्नत्ता(सूत्रं२६७)अह भंते खेत्तातिकंतस्स कालातिकतस्स मग्गातिकंतस्स पमाणा ७ शतके उद्देशः १ अनायुक्तगमनसांगारमार्गातिक्रान्तादि सू०२६६ २६७ ॥५३२॥
SR No.600376
Book TitleVyakhyapragnapti Sutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAbhaydevsuri
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages367
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size31 MB
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