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________________ वृषभाणां भवतो गीतार्थानां, ते हि सूत्रार्थं चिन्तयन्यंतस्तावत्तिष्ठन्ति यावत्प्रहद्धयमतिक्रान्तं भवति, तृतीया च श्रीभोधનિર્યુક્તિ पौरुष्यवतरति, ततस्ते चैव कालं गृह्णन्ति अड्डरत्तियं, उवज्झायाईणं संदिसावेत्ता ततो कालं घेत्तूणं आयरियं उट्ठवेंति, भाग-२ ण वंदणयं दाऊण भणन्ति-सुद्धो कालो, आयरिया भणंति-तहत्ति, पच्छा ते वसभा सुयंति, आयरिओवि बितियं उट्ठावेत्ता कालं पडियरावेइ, ताहे एगचित्तो सुत्तत्थं चिंतेइ जाव वेरत्तियस्स कालस्स बहुदेसकालो, ताहे तइयपहरे अतिक्कंते सो ॥93४॥ म कालपडिलेहगो आयरियस्स पडिसंदेसावेत्ता वेरत्तियं कालं गेण्हइ, आयरिओवि कालस्स पडिक्कमित्ता सोवति, ताहे जे सोइयल्लया साहू आसी ते उट्ठेऊण वेरत्तियं सज्झायं करेंति जाव पाभाइयकालगहणवेला जाया, ततो एगो साह | उवज्झायस्स वा अण्णस्स वा संदिसावेत्ता पाभाइयं कालं गेण्हइ, जहा नवण्हं कालगहणाणं वेला पहुच्चति सञ्झाए भ आरतो चेव पुणो ताहे साहुणो सव्वे उडेति, किह पुण नव काला पडिलेहिज्जंति, पढमो उवट्ठिओ कालग्गाहो तस्स तिन्नि भ वारा कालो उवहओ एक्कमि मंडलए, तओ पुणो बितिओ उठेइ सो बितिए मंडलए तिन्नि वारा लेइ, तिस्स जदि न - ओ सुज्झति ततो तइओ साहू उद्वेइ, सोवि ततिए मंडलए तिण्णि वारा लेइ, लिंतस्स जदि न सुज्झति ताहे भग्गो कालो, ओ एत्थ लिंताण साहूण नववारावसाणे पभा फुट्टति, ततो तीए वेलाए पडिक्कमन्ति, अह तिण्णि कालगाहिणो नत्थि किं तु दुवे चेव, तत्तो इक्को पढम पढमकालमंडलए तिण्णि वारा उ बिइओ साहू लेऊण ततो बितिए दो वारे गिण्हड, ततो दी बितिओ साहू बीयए चेव कालमंडलए एक्कं वारं लेऊण ततो तइए मंडले तिन्नि वारातो गेण्हइ, एवं चेव नव वारा हवंति, ॥93४॥ RESE 100
SR No.600369
Book TitleOgh Niryukti Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGunhansvijay, Bhavyasundarvijay
PublisherKamal Prakashan Trust
Publication Year2008
Total Pages894
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_oghniryukti
File Size16 MB
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