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________________ % * नवाङ्गी % १०० पीज्ञाताधर्मकथाङ्गे % % % आ ग्रन्थना वृत्तिकार प्रस्तावना। आ श्रीज्ञाताधर्मकथाजना वृत्तिकार श्रीअभयदेवसूरिजी छे. अगीआर अंगो पैकी श्रीआचारांगनी अने श्री सूत्रकृताङ्गनी (पूर्व जणावेला | आ बे अंगोनी ) वृत्ति करनार श्रीशीलांकसूरिजी छे. आ बे अंगनी वृत्ति करेली होवाथी श्रीअभयदेवसूरिजीए त्रीजा श्रीस्थानाङ्गसूत्रनी | वृत्ति करवानो प्रारम्भ कर्यो, अने ते पछी अनुक्रमे श्रीसमावायाङ्गसूत्रथी अगी आरमा श्रीविपाक सुधीना नवे अंगोनी वृत्ति तेओश्रीए | करी; आथी तेओश्रीने नवाङ्गीवृत्तिकार तरीके चतुर्विध संघ सारी रीते पीछाणे छे. शासनमान्य सूत्रोनी वृत्ति करतां वृत्तिकारोना हृदय विशाल होय छे, अने तेवी विशालताने श्रीअभयदेवसूरिजी अनुसर्या छे. अंग-उपांग-सूत्रादि पर पूर्वाचार्योए नियुक्ति-भाष्य| चर्णि विगेरे जे जे रचनाओ करी होय ते ते रचनाओना भावो स्मृतिपथमां स्थिर करीने-वृत्ति आलेखन अवसरे बन्धबेसता ते | पूर्वाचार्यप्रणीत-भावोने आलेखवामा लेशभर संकोच राखताज नथी, ते हार्दिक-विशालतानुं प्रतीक छे. "पूर्वाचार्योए जे कयुं ते ज13 कहे छे, पूर्वाचार्यप्रणीत केटलीक पतिओ एक सरखी छे. लखाणना भावो लगभग सरखा छे तेम नवीन आलेखन घणुंज ओछं छे. विगेरे " कहेवू अने उपरथी वधु पडतुं कहेवू के पूर्व आलेखनमाथी चोरी करी छे, आवी रीते कहेवानी अने समजवानी उतावल कोई पण वांचके, विचारके के अभ्यासके करवीज नहिं. तत्त्वदृष्टिए विचारीए तो पूर्वपुरुषो प्रत्येर्नु आ बहुमान सूचवे छ. मार्गानुसारिना गुणोनुं वर्णन करतां कलिकालसर्वज्ञे पूर्वाचार्यना आलेखननुं अनुकरण कर्यु छे. आधीज विशालहृदयना वृत्तिकारोनो ए स्पष्ट निर्णय हतो के-" पूर्वपुरुषोए जे बाबतनो खूलासो न कर्यो होय ते सम्बन्धमा खूलासो करवानो होय, परन्तु जे विषयमा पहेलानु मले त्यां | सुधी म्हारी बुद्धिन कहेवूज नहिं आ हृदय-विशालतानुं वास्तविक प्रतीक छे. HE4%9C% %a सके करवीज आलेखननु असम्बन्धमा खुला 4
SR No.600322
Book TitleGnata Dharmkathangam
Original Sutra AuthorN/A
AuthorChandrasagarsuri
PublisherSiddhchakra Sahitya Pracharak Samiti
Publication Year1951
Total Pages440
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_gyatadharmkatha
File Size32 MB
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