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________________ चन्द्रप्रमस्वामि चरित्रम् द्वितीयः परिच्छेदः ॥३१॥ इत्युपरोधदानस्याप्यैहिकाऽमुष्मिकं फलम् । श्रुत्वा महामतिनित्यं, दद्यादानं महात्मनाम् ।। ४७ ॥ ॥ इत्युपरोधदाने सुन्दरकथा ॥ ॥अथ भावनादाने वणिक्सुतकथा॥ नयरी अत्थि अवज्झा, वंझा भयअसुहकोहदोहेहिं । अत्थीण व पच्चत्थीण वि, दाया तत्थत्थि भीमनिवो॥२॥ रणो तस्स य मंती भत्तो सत्तो त्थि लक्खणो नाम । पंचसयअमच्चाणं मुक्खो जक्खाण धणदो व ॥२॥ तस्स य दो घरिणीओ रत्तिपीईउ व्व कामएवस्स । अइमाणिणीओ अइकोहिणीओ अइकलहवंतीओ ॥ ३॥ तो सइवेण घरस्स य एगा अहभूमिसामिणी विहिआ । अवरा उण उवरिंमि सुआणणव कित्तिकित्तीओ॥४॥ अह मंतिस्स कयाई रायउले ठियवयस्स रत्तिम्मि । जाए कालविलंबे ईय चिंतइ उवरिमा घरिणी ॥५॥ निच्चं मम वारम्मि कत्थ वि अन्नत्थ एस विल सेइ । हिडियरंडाए उण छूज्झइ तेडिओ झत्ति ॥६॥ ताहं अप्पदुवारं उग्याडिस्सामि नागयस्सावि । इय कोहेण धमंती पिहिअ दुवारं पसुत्ता सा ॥ ७॥ अह आगओ अमच्चो निसीहसमयंमि खिण्णसव्वंगो । गमिय उवरिमि सणियं बारंबारं ति सो भणइ ॥८॥ सा वि अलीअपसुत्ता सदं नो देहि वाहरंतस्स । अह चाइणि करंतस्स वि हुँ इत्ति वि न सा कुणइ॥६॥ निविण्णस्स य स सइवस्सुत्तरमाणस्स हिद्विमपियाए । दत्तो हत्थालंबो अह सो उत्तरिउमाढत्तो॥१०॥ कामकेतुकथान्तर्गता भावनादाने वणिक्सुतकथा। ॥३१॥
SR No.600270
Book TitleChandraprabhswamicharitam
Original Sutra AuthorJinendrasuri
Author
PublisherHarshpushpamrut Jain Granthmala
Publication Year1986
Total Pages404
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size7 MB
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